मुंबई। क्रिकेट की दुनिया में अपनी पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन अगर जुनून और मेहनत हो तो मुश्किल रास्ते भी मंजिल तक ले जाते हैं। ऐसी ही कहानी है पुष्कर शर्मा की, जिन्होंने कम उम्र में पिता को कैंसर के कारण खो दिया। परिवार की जिम्मेदारियों और आर्थिक चुनौतियों के बीच भी उन्होंने क्रिकेट खेलने का सपना नहीं छोड़ा। आज वही पुष्कर केन्या की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेल रहे हैं।
पुष्कर का क्रिकेट से जुड़ाव स्कूली दिनों से ही हो गया था। उत्तर प्रदेश के हाथरस स्थित इसेपुर गांव से क्रिकेट के बेहतर अवसरों की तलाश में वह मुंबई पहुंचे और पढ़ाई मुंबई में की। धीरे-धीरे उनका खेल निखरने लगा और उन्हें मुंबई की अंडर-16 टीम की कप्तानी करने का मौका मिला।
यशस्वी, पृथ्वी और अर्जुन जैसे खिलाड़ियों के साथ किया सफर
मुंबई क्रिकेट के दौरान पुष्कर को उस दौर के कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के साथ खेलने और कप्तानी करने का मौका मिला। उनकी टीम में यशस्वी जायसवाल, पृथ्वी शॉ और अर्जुन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी भी शामिल रहे। पुष्कर ने 2014 से 2018 के बीच मुंबई क्रिकेट के इस सफर में अपनी अलग पहचान बनाई।
लेकिन इसी दौरान जिंदगी ने उन्हें बड़ा झटका दिया। वर्ष 2017 में उनके पिता शिवशंकर शर्मा का कैंसर से निधन हो गया। उस समय पुष्कर की उम्र महज 16 वर्ष थी। दो बहनों के इकलौते भाई होने के कारण परिवार की जिम्मेदारियां भी उनके कंधों पर आ गईं। आर्थिक परेशानियों के कारण क्रिकेट जारी रखना मुश्किल हो गया और एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें अपना सपना छोड़ने के बारे में सोचना पड़ा।

सपने को बचाने के लिए 18 साल की उम्र में पहुंचे केन्या
हालात चाहे कितने भी मुश्किल रहे हों, पुष्कर ने क्रिकेट से दूरी बनाने के बजाय एक बड़ा फैसला लिया। करीब 18 साल की उम्र में वह किटबैग लेकर नैरोबी, केन्या चले गए। वहां उन्होंने नौकरी के साथ क्रिकेट की प्रैक्टिस जारी रखी और स्थानीय लीग में अपना प्रदर्शन बेहतर किया। नैरोबी की लीग क्रिकेट में उनके बल्ले ने जमकर रन बनाए। एक सीजन में 14 मुकाबलों में उन्होंने *841 रन और चार शतक* जड़े। उनकी लगातार मेहनत और शानदार प्रदर्शन ने उन्हें केन्या के क्रिकेट सिस्टम में पहचान दिलाई।
173 रन की पारी ने बदली कहानी
पुष्कर के करियर में एक अहम मोड़ तब आया जब उन्होंने 154 गेंदों पर 173 रन की शानदार पारी खेली। इस प्रदर्शन के बाद केन्या क्रिकेट में उनकी चर्चा तेज हुई और राष्ट्रीय टीम तक पहुंचने का रास्ता मजबूत हुआ। 2022 में उन्हें केन्या की राष्ट्रीय टीम की कैप मिली। इसके बाद उन्होंने ICC के अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों और क्वालीफायर में केन्या का प्रतिनिधित्व किया। एक भारतीय क्रिकेटर का दूसरे देश की राष्ट्रीय टीम के लिए खेलना अपने आप में उनके संघर्ष और सफर की खास कहानी है।
बड़े खिलाड़ियों से सीखी क्रिकेट की बारीकिय
केन्या में पुष्कर को अनुभवी क्रिकेटरों और कोचों से सीखने का मौका मिला। *थॉमस ओडोयो और अंगारा* जैसे अनुभवी नामों के मार्गदर्शन में उन्होंने अपने खेल को लगातार बेहतर किया। वहीं मुंबई में क्रिकेट के शुरुआती दौर में उन्हें सचिन तेंदुलकर और अजिंक्य रहाणे जैसे बड़े खिलाड़ियों से भी क्रिकेट की बारीकियां सीखने का अवसर मिला।
आज पुष्कर केन्या के लिए एक आक्रामक ओपनिंग बल्लेबाज के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। इंटरनेशनल क्रिकेट में उनके सफर ने यह साबित किया है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, लगातार मेहनत करने वाला खिलाड़ी अपनी मंजिल तक पहुंच सकता है।
सपना अभी बाकी है
पुष्कर का मानना है कि यह सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। उनका सबसे बड़ा सपना *IPL में खेलना और भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेलने का मौका हासिल करना* है। केन्या के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के बाद अब उनकी नजर दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग और भारत की राष्ट्रीय टीम पर है।
फिलहाल टीम से ब्रेक के दौरान पुष्कर राजस्थान पहुंचे, जहां उन्होंने खाटूश्यामजी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। जयपुर पहुंचने पर उनके करीबी मित्रों और शुभचिंतकों ने भी उनका स्वागत किया। फोटो में पुष्कर शर्मा के जिगरी दोस्त विपिन शर्मा, कपिल शर्मा, मृत्युंजय सिंह, गौरी शुक्ला और भोला शर्मा मौजूद रहे। वहीं जयपुर में महेश शर्मा ने भी पुष्कर का स्वागत किया।




