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Opinion: 4-1 से सीरीज जीतने के बाद भी कुछ सवालों ने किया परेशान, घर में ही स्पिनर्स के सामने टिक नहीं पा रहे हैं भारतीय बल्लेबाज, जानें कहां चूक रहे हैं बल्लेबाज…

Opinion: भारतीय टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ खेली जा रही पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में 4-1 से सीरीज को अपने नाम किया। इस टेस्ट सीरीज को जीतकर भारतीय टीम विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में पहले स्थान के लिए दावेदारी मजबूत कर दी। लगातार दो बार विश्व टेस्ट चैंपिशनशिप का फाइनल खेलने के बाद टीम इंडिया इस बार भी टेस्ट चैंपिशनशिप फाइनल खेलने के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है। इस सीरीज को भारतीय टीम ने भले ही 4-1 से अपने नाम कर लिया हो लेकिन इस टेस्ट सीरीज और पिछले कुछ सालों में घर पर खेले गए टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम की एक कमी तेजी से उजागर हुई है।

ऐसी कमी उजागर हुई है जिसमें कभी भारतीय टीम को महारत हासिल थी। पिछले कुछ सालों में भारतीय टीम स्पिन खेलने में फिसड्डी साबित हुई है। भारतीय टीम को भारत में ही स्पिन खेलने में अब परेशानी होने लगी है। जबकि पहले यही भारतीय टीम के जीत का मंत्रा था। विदेशी टीमें के खिलाफ स्पिन ट्रैक तैयार करके उनके चारों खाने चित कर देते थे। अब ऐसा हो गया है कि विदेशी टीमें भारत का दौरा करती है तब दो-तीन अच्छे स्पिनर को शामिल कर भारतीय टीम को परेशान कर देती है। यहां आने के बाद उनके एवरेज गेंदबाज भी शानदार गेंदबाज बन जाते हैं।

जबकि पहले भारतीय टीमों ने घरेलू और उपमहाद्वीपीय परिस्थतियों में स्पिन के अनुकूल पिचों में शानदार बल्लेबाजी की है। हालांकि अभी वर्तमान में भारतीय टीम स्पिन का सामना करने में पूरी तरह से जुझते नजर आती हैं। भारतीय टीम की गेंदबाजी भारत में शुरू से ही बेहतरीन रही है। अभी यह और मजबूत हो गई है जबकि बल्लेबाजी में स्पिन खेलने की कला में कमी देखने को मिली है।

70 के दशक में भारत की स्पिन चौकड़ी

भारतीय टीम जो कभी 70 के दशक में अपनी स्पिन गेंदबाजी से विरोधियों को परेशान किया करते थी। वहीं आज के समय में हमारे बल्लेबाज परेशान हो जाते हैं। 70 के दशक में इराप्पल्ली प्रसन्ना, बीएस चन्द्रशेखर, वेंकट राघवन और बिशन सिंह बेदी की प्रसिद्ध चौकड़ी थी, जो भारतीय पिचों पर विदेशी टीमों के खिलाफ हावी रहती थी। इन लोगों ने विदेशी बल्लेबाजों के मन में इतना डर बना दिया था कि भारत का दौरा करने वाली टीमें एक महीना पहले से ही स्पिन खेलने का अभ्यास शुरू कर देती थी लेकिन फिर भी इनकी चौकड़ी बल्लेबाजों को कुछ खास करने का मौका नहीं देती थी।

उसके बाद 1980 से लेकर 2010 तक भारतीय टीम के पास ऐसे बल्लेबाज थे जो भारत में ही नहीं बाहर भी जाकर अपनी छाप छोड़ी। कुछ ऐसे बल्लेबाज भी थे, जिन्हें घर पर स्पिन खेलने में महारत हासिल थी और अगर विदेश का दौरा करे तो स्विंग और पेस खेलने में भी माहिर थे। उस दौरान भारत में कई ऐसे दिग्गज स्पिनर भी आएं, जिन्होंने पूरी दूनिया में अपनी छाप छोड़ी लेकिन भारतीय बल्लेबाजों के आगे नतमस्तक हो गए। शेन वार्न से लेकर मुथैया मुरलीधरन तक कई ऐसे दिग्गज भी आएं लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने उन दिग्गज स्पिनरों का डटकर सामना किया और स्पिन खेलने की कला भी दुनिया को दिखाई।

हमारी ताकत ही बनी कमजोरी

आखिरी पिछले कुछ समय में ऐसा क्या हो गया कि जो हमारी ताकत थी, वही हमारी कमजोरी बन गई। भारतीय खिलाड़ी जो स्पिन के अनुकूल पिचों पर खेलकर बड़े हुए हैं लेकिन आज वही बल्लेबाज स्पिन का ढंग से सामना नहीं कर पा रहे हैं। जहां विकेट खराब होने लगती है भारतीय टीम के बल्लेबाजों के पांव क्रीज पर जमते ही नहीं हैं। समय के साथ भारतीय खिलाड़ियों का स्पिन खेलने के लिए जो तकनीक होनी चाहिए, वो धीरे-धीरे खराब होता जा रहा है। अब महेमान टीम को जितना मुश्किल स्पिन खेलने में होती है उतना ही मुश्किल भारतीय टीम को भी स्पिन का सामना करने में होती है।

स्पिन के खिलाफ क्यों संघर्ष कर रहे हैं बल्लेबाज

भारतीय पिचों पर स्पिनरों को खासा फायदा मिलता है। यहां स्पिनरों को विकेट से काफी मदद मिलती है, जिसके कारण भारत में स्पिनर ज्यादा करागर साबित होते हैं। जैसे-जैसे विकेट टूटने लगती है स्पिनरों को टर्न के साथ अधिक उछाल भी मिलने लगती है। अगर गेंदबाज गेंद को ड्रिफ्ट करवाना जानते हैं तब तो बल्लेबाजों को ऐसे गेंदबाज का सामना करने में ज्यादा ही कठिनाई आती है। क्योंकि ऐसे गेंदबाज पिच से अधिक फायदा लेने में कामयाब रहते हैं और बल्लेबाजों को खूब परेशान करते हैं।

भारत में विकेट सूखी और धीमी होती है साथ ही साथ विकेट में असमतल उछाल के साथ गेंद भी तेजी से टर्न होता है। ऐसी विकेटों पर खेलने के लिए बल्लेबाजों को अधिक सतर्कता दिखाने की जरूरत होती है। जिसके लिए बल्लेबाजों को स्पिन खेलने की कला बखूबी आनी चाहिए। स्पिन खेलने में परेशानी के कारण बल्लेबाज स्ट्राइक रोटेट नहीं कर पाते हैं। जिसके कारण भी स्पिनर्स बल्लेबाजों पर हावी हो जाते हैं। जब कोई एक बल्लेबाज ओवर की 6 गेंदें खुद खेलता है तब उसके आउट होने की संभावना भी ज्यादा होती है। इसलिए ऐसा कहा जाता था कि आप स्ट्राइक रोटेट करते रहें जिससे गेंदबाज को परेशानी हो, बल्लेबाज को नहीं।

विदेशी स्पिनर ने किया परेशान

पिछले 10-15 सालों में भारत में डेब्यू करने वाले विदेशी स्पिनर ने भारतीय बल्लेबाजों को मुश्किल में डाला है। 2008 में जब ऑस्ट्रेलिया की टीम भारत का दौरा करने आई थी तब जेसन क्रेजा ने अपने डेब्यू मुकाबले के पहली पारी में 8 और दूसरी पारी में 4 विकेट चटकाए थे। उसके बाद से विदेशी स्पिनर भारतीय बल्लेबाजों पर हावी होने लगे। अगर ऑस्ट्रेलिया के स्टीव ओ कैफी की बात करें तो उन्होंने 2021 में भारत का दौरा करते हुए दोनों पारी में 6-6 विकेट लिए थे। वहीं मैट कुहनैमन ने 5 विकेट लेकर भारतीय टीम को बता दिया था कि स्पिन खेलने की कला अब आपके पास उतनी अच्छी नहीं रही।

उसके बाद न्यूजीलैंड के एजाज पटेल ने एक पारी में 10 विकेट लेने का कारनामा भी भारत के खिलाफ भारत में ही किया। उन्होंने उस मैच में कुल 14 विकेट चटकाए। वहीं टॉड मर्फी ने 2023 में डेब्यू करते हुए एक पारी में 5 विकेट चटकाए। अब इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले ही मैच में टॉम हर्टली ने डेब्यू करते हुए एक पारी में 7 विकेट चटकाए। उसके बाद शोएब बशीर ने इस टेस्ट सीरीज के चौथे और पांचवें मुकाबले में पांच-पांच विकेट चटकाए। इस सीरीज में इंग्लैंड के टॉम हार्टली ने कुल 22 विकेट चटकाए। इन 10-15 सालों में विदेशी स्पिनर ने भारत में आकर भारतीय टीम को ही परेशान किया है।

बल्लेबाज तकनीक पर नहीं कर पाते हैं काम

अब सालभर लगातार ही पूरे विश्व में क्रिकेट खेला जाता है। ऐसे में इंटरनेशनल क्रिकेटरों को अपनी कमियों पर काम करने का मौका भी बहुत कम मिलता है। अब जो भारतीय क्रिकेटर इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने लगते है वो घरेलू क्रिकेट में भाग नहीं लेते हैं। जिस कारण से उन्हें घरेलू गेंदबाज या स्पिनर को खेलने का कम मौका मिलता है। इसके अलावा अब बल्लेबाज गेंदबाज के साथ कम और बॉलिंग मशीन के साथ ज्यादा दिखते हैं। बॉलिंग मशीन के साथ बल्लेबाज घंटों अभ्यास करते हैं। वहीं लगातार क्रिकेट होने के कारण सीमित ओवरों में बल्लेबाज स्पिनर पर ज्यादा अटैकिंग रुख अपनाते हैं और रन बनाने की कोशिश करते रहते हैं। फील्ड रिस्ट्रिक्शन होने के कारण बल्लेबाजों की कमियों का पता नहीं चलता है। जैसे ही यही बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट खेलते हैं उनकी कमियां साफ नजर आने लगती है।

गेंदबाज भी अब पहले जितना अभ्यास नहीं करते हैं। तीन फॉर्मेट में अपने आप फिट रखने के लिए गेंदबाज नेट में भी काफी कम समय व्यतीत करते हैं। जिस कारण से भी बल्लेबाजों को अपनी कमियों के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं चलता है। लगातार मैचेज के कारण गेंदबाज अब ज्यादातर अपने फिटनेस पर ध्यान देते हैं। जिससे वो ज्यादा से मैच खेल पाएं। इस कारण से अब ज्यादातर बल्लेबाजों को नेट गेंदबाज ही अभ्यास कराते नजर आते हैं।

घरेलू क्रिकेट में स्पिनर अब उतने करागर नहीं

अब बात यह भी है कि अब घरेलू क्रिकेट में उतने अच्छे स्पिनर भी नहीं रह गए हैं जो बल्लेबाजों को ज्यादा परेशान कर सके। पहले घरेलू क्रिकटे में एक से बढ़कर एक स्पिनर हुआ करते थे। जो इंटरनेशनल क्रिकेट के साथ-साथ घरेलू क्रिकेट को भी तवज्जो देते थे, लेकिन अब ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। अब लगातार मैचेज रहने के कारण इंटरनेशनल क्रिकेटर घरेलू में शामिल नहीं हो पाते है जिस कारण से अब बल्लेबाजों को क्वालिटी के स्पिनर नहीं मिलते हैं। इस कारण से भी अब घरेलू क्रिकेट में स्पिनर उतने करागर साबित नहीं होते हैं। अच्छे स्पिनर के नहीं होने के कारण बल्लेबाजों की कमियां नजर नहीं आती है।

स्पिन खेलने की बढ़िया तकनीक क्या है…

स्पिन को खेलने के लिए सबसे अच्छा उपाय है कि आपके कदम चलते रहें। आप फ्रंटफूट और बैकफूट का इस्तेमाल अच्छे ढंग से करें। कुछ बल्लेबाज टर्न कम करने के लिए निकलकर खेलते है और कुछ बल्लेबाज गेंद को टर्न होने के बाद खेलना पंसद करते हैं। अगर आप ऐसे स्पिन को खेलोंगे तब सफलता आपको मिलेगी। स्पिनर के खिलाफ अगर आप फंस गए तब गेंदबाज आपको निश्चित तौर पर आउट कर देगा। इसके अलावा आपके हाथ सॉफ्ट होने चाहिए ताकि आसपास लगे फील्डर के पास गेंद नहीं जानी चाहिए। टेस्ट क्रिकेट में कुछ इस ढंग से स्पिन खेलकर आप अच्छे स्पिनर का सामना कर सकते हैं।

लेखक: उज्जवल कुमार सिन्हा

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बिहार राज्य जूनियर शतरंज प्रतियोगिता संपन्न, बालक वर्ग में प्रेम कुमार एवं बालिका वर्ग में आदिवा उल्लाह बने विजेता

बिहार:  अखिल बिहार शतरंज संघ एवं मुजफ्फरपुर जिला शतरंज संघ के संयुक्त तत्वावधान में मुजफ्फरपुर के चंद्र विला फार्म हाउस में आयोजित रुंगटा टी बिहार स्टेट जूनियर फिडे रेटिंग शतरंज प्रतियोगिता के नौ चक्रों के बाद बालक वर्ग में प्रेम कुमार एवं बालिका वर्ग ने आदिवा उल्लाह बिहार राज्य जूनियर एवं जूनियर गर्ल्स का विजेता घोषित किए गए।

बालिका वर्ग में पटना की अदिबा उल्लाह एवं मुजफ्फरपुर की नव्या गोयनका ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 8-8 अंक अर्जित किए। टाई-ब्रेक के आधार पर अदिबा उल्लाह को प्रथम तथा नव्या गोयनका को द्वितीय स्थान मिला।

पुरस्कार वितरण के अवसर पर मुख्य अतिथि श्री धर्मेंद्र कुमार, अध्यक्ष, साउथ एशियन चेस परिषद ,विशिष्ट अतिथियों के रूप में श्री अशोक कुमार नेमानी सेल्स हेड, रुंगटा टी प्राइवेट लिमिटेड, बिहार एवं झारखंड , श्री रवि धारियां, डिप्टी जोनल मैनेजर, बैंक ऑफ इंडिया; डॉ. संजय श्रीवास्तव, एमडी, आशव हॉस्पिटल, डॉ अमृता श्रीवास्तव, दीपक चंद्रा, वाइस प्रिंसिपल, सेंट जेवियर्स जूनियर/सीनियर स्कूल; डॉ.अविनाश त्रिपाठी, सीनियर मैनेजर HDFC एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने विजेताओं को ट्रॉफी एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन मुजफ्फरपुर जिला शतरंज संघ के सचिव श्री हिमांशु कुमार ने किया।

इस अवसर पर अखिल बिहार शतरंज संघ के संयुक्त सचिव नंदकिशोर, विपल सुभाषी, शशिनन्द कुमार, शिवप्रिया भारद्वाज, प्रत्यूष कुमार, अंतरराष्ट्रीय निर्णायक आलोक प्रियदर्शी, मुजफ्फरपुर जिला शतरंज संघ के उपाध्यक्ष श्री आभाष कुमार, कोषाध्यक्ष श्री अभिजीत कुमार , संयुक्त सचिव श्री सुनील कुमार, मनीष कुमार समेत कई अधिकारी एवं अभिभावक उपस्थित थें।

प्रथम दस स्थानों पर आनेवाले खिलाड़ियों की सूची इस प्रकार है:
बालक वर्ग
1 प्रेम कुमार, छपरा — 7.5 अंक
2 अनिकेत रंजन, बेगूसराय — 7.5 अंक
3 शिवांश बरनवाल, बेतिया — 7 अंक
4 तेजस शांडिल्य, मुजफ्फरपुर — 6.5 अंक
5 अनुभव मिश्रा, मधुबनी — 6.5 अंक
6 पार्थवाह, पटना — 6.5 अंक
7 श्रेष्ठ कियान, वैशाली — 6.5 अंक
8 तन्मय कश्यप, पटना — 6.5 अंक
9 मानस, पटना — 6.5 अंक
10श्रेष्ठ प्रताप सिंह, पटना — 6.5 अंक

बालिका वर्ग
1 अदिबा उल्लाह, पटना — 8 अंक
2 नव्या गोएंका, मुजफ्फरपुर — 8 अंक
3 अग्रिमा राज, मुजफ्फरपुर — 6.5 अंक
4 मून, कटिहार — 6 अंक
5 ईशिका, बेगूसराय — 6 अंक
6 शालिनी श्रीवास्तव, पटना — 6 अंक
7 अनारा शर्मा, किशनगंज — 5.5 अंक
8 प्रतीक्षा राज, पटना — 5 अंक
9 अभिनव अविका, पटना — 5 अंक
10 राज श्रेया, सीतामढ़ी — 5 अंक

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पीआईआर क्रिकेट एकेडमी के महा तेजस्वी का सीबीएसई नेशनल के लिए चयन, बिहार का करेंगे प्रतिनिधित्व

पटना/प्रयागराज। पीआईआर क्रिकेट एकेडमी के होनहार युवा क्रिकेटर महा तेजस्वी ने अपनी प्रतिभा के दम पर सीबीएसई नेशनल प्रतियोगिता के लिए बिहार अंडर-14 टीम में जगह बनाई है। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में महा तेजस्वी बिहार का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनके चयन से पीआईआर क्रिकेट एकेडमी में खुशी का माहौल है।

प्रयागराज में 18 से 23 सितंबर तक आयोजित सीबीएसई के ट्रायल एवं चयन शिविर में महा तेजस्वी ने शानदार प्रदर्शन किया। उनके खेल कौशल और प्रदर्शन से प्रभावित चयनकर्ताओं ने उन्हें बिहार की अंडर-14 टीम के लिए चुना। अब वह राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते नजर आएंगे।

 

मदुरै में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उतरेंगे

सीबीएसई नेशनल प्रतियोगिता का आयोजन तमिलनाडु के मदुरै में किया जाना है। प्रतियोगिता में देशभर के विभिन्न राज्यों की टीमें हिस्सा लेंगी। इस राष्ट्रीय मंच पर महा तेजस्वी बिहार की टीम का प्रतिनिधित्व करेंगे। एकेडमी से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि वह अपने प्रदर्शन से बिहार और पीआईआर क्रिकेट एकेडमी का नाम रोशन करेंगे।

महा तेजस्वी के चयन पर पीआईआर क्रिकेट एकेडमी के कोच पंकज मिश्रा, रितेश रंजन और इंद्रजीत कुमार समेत एकेडमी के पदाधिकारियों एवं खेल प्रेमियों ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि महा तेजस्वी का चयन उनकी मेहनत, नियमित अभ्यास और खेल के प्रति अनुशासन का परिणाम है।

एकेडमी प्रबंधन ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में बिहार का प्रतिनिधित्व करना महा तेजस्वी के लिए बड़ी उपलब्धि है। इससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि एकेडमी के अन्य युवा खिलाड़ियों को भी बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलेगी। एकेडमी परिवार ने महा तेजस्वी के आगामी मुकाबलों के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जतायी है।

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नालंदा जिला क्रिकेट संघ की कमिटी ऑफ मैनेजमेंट की बैठक संपन्न

बिहारशरीफ़ । नालंदा जिला क्रिकेट संघ की कमिटी ऑफ मैनेजमेंट (सीओएम) की बैठक रविवार , 4 अक्टूबर 2026 को संघ के कार्यालय में अध्यक्ष श्री शैलेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में आगामी सत्र की क्रिकेट गतिविधियों एवं संघ से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया तथा कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

सत्र 2026-27 के लिए क्लबों एवम खिलाड़ियों के निबंधन की प्रक्रिया 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार से शुरू होगी, जिसकी अंतिम तिथि 4 नवंबर 2026, बुधवार (15 दिन ) निर्धारित की गई है। जिसमे 20 अक्टूबर 2026 से 25 अक्टूबर 2026 तक क्लबों का निबंधन तथा 26 अक्टूबर 2026 से 4 नवंबर 2026 तक खिलाड़ियों का निबंधन किया जायेगा। सत्र की शुरुआत जूनियर लीग NDJL – 2027 स्व0 राजू वाल्स नालंदा जिला जूनियर क्रिकेट लीग से की जायगी।

बैठक में सत्र 2025-26 में संपन्न जूनियर, सीनियर ए डिवीजन तथा बी डिवीज़न लीग आयोजन पर भी चर्चा की गयी। पीछले सत्र के बी डिवीज़न के शेष मैचों को संपन्न करने पर निर्णय लिया गया।

नालंदा जिला क्रिकेट लीग से सम्बंधित जानकारी एवम फॉर्म हेतु सिद्धार्थ आनंद को प्रभार सौंपा गया है। सभी क्लब एवं खिलाड़ियों को सिद्धार्थ आनंद से फोन नंबर 6201024973 पर सम्पर्क करना होगा।

सत्र 2026-27 नालंदा जिला क्रिकेट लीग के किसी भी प्रारूप मे भाग लेने वाले क्लबों को शपथ पत्र देना अनिवार्य करने पर निर्णय लिया गया जिसके अनुसार क्लब के सचिव /अध्यक्ष मे से किसी के द्वारा लीग मे भाग लेने हेतु क्लब के लेटर पैड पर निवेदन के साथ एक शपथ पत्र जमा करना अनिवार्य किया गया है।

नालंदा जिला क्रिकेट संघ का कार्यकाल नवंबर 2026 मे समाप्त होने के कारण नही कमिटी के गठन हेतु चुनाव तथा एजीएम पर निर्णय लिया गया। नालंदा जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष शैलेन्द्र कुमार इसके लिए प्रभार सौंपा गया।

बैठक में संघ के पदाधिकारियों एवं कमिटी ऑफ मैनेजमेंट के सदस्यों ने आगामी सत्र की क्रिकेट गतिविधियों को व्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संचालित करने को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देशों एवं तैयारियों पर भी चर्चा की।

नालंदा जिला क्रिकेट संघ के सचिव श्री गोपाल कुमार सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ सभा संपन्न की गई।

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बिहार का शानदार प्रदर्शन, बालक-बालिका दोनों वर्गों में क्वार्टर फाइनल में प्रवेश

हैदराबाद, तेलंगाना। 33वीं बालक एवं 26वीं बालिका सब-जूनियर राष्ट्रीय आट्या-पाट्या चैंपियनशिप 2026-27 में बिहार की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बालक एवं बालिका दोनों वर्गों में क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। बिहार के खिलाड़ियों के उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन से टीम में उत्साह का माहौल है।

बालक वर्ग में बिहार को पूल-D में पुडुचेरी, दिल्ली और मध्य प्रदेश के साथ रखा गया था। लीग मुकाबले में बिहार का पहला मैच मध्य प्रदेश के विरुद्ध हुआ, जिसमें बिहार ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए मध्य प्रदेश को 53 अंकों के अंतर से पराजित किया।

इसके बाद बिहार का मुकाबला पुडुचेरी से हुआ, जिसमें टीम को हार का सामना करना पड़ा। वहीं दिल्ली के विरुद्ध बिहार ने दमदार वापसी करते हुए 10 अंकों से जीत दर्ज की। इस प्रदर्शन के आधार पर बिहार ने क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।

वहीं बालिका वर्ग में भी बिहार की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन किया। बिहार को पूल-D में आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी और छत्तीसगढ़ के साथ रखा गया था। बिहार ने अपने पहले मुकाबले में आंध्र प्रदेश को 23 अंकों से हराकर शानदार शुरुआत की।

इसके बाद पुडुचेरी के विरुद्ध बिहार को हार का सामना करना पड़ा, जबकि छत्तीसगढ़ के खिलाफ बिहार की बालिकाओं ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए 13 अंकों से जीत दर्ज की। इस प्रदर्शन के साथ बिहार की बालिका टीम ने भी क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।

बिहार के मुख्य कोच आरुष कुमार आजाद ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि टीम ने अब तक अच्छे खेल का प्रदर्शन किया है। उन्होंने बताया कि *बालक और बालिका दोनों वर्गों में बिहार के क्वार्टर फाइनल मुकाबले खेले जाएंगे* , जिसमें खिलाड़ी पूरी तैयारी और आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरेंगे।

इसी राष्ट्रीय चैंपियनशिप के दौरान आट्या-पाट्या एसोसिएशन ऑफ बिहार के सचिव तरुण कुमार आजाद को भी सम्मानित किया गया। उनके सम्मानित होने पर बिहार आट्या-पाट्या परिवार में खुशी का माहौल है।

बिहार की दोनों टीमों के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने से राज्य के खेलप्रेमियों में उत्साह बढ़ गया है। खिलाड़ियों से आगामी मुकाबलों में भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

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