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Opinion: 4-1 से सीरीज जीतने के बाद भी कुछ सवालों ने किया परेशान, घर में ही स्पिनर्स के सामने टिक नहीं पा रहे हैं भारतीय बल्लेबाज, जानें कहां चूक रहे हैं बल्लेबाज…

Opinion: भारतीय टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ खेली जा रही पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में 4-1 से सीरीज को अपने नाम किया। इस टेस्ट सीरीज को जीतकर भारतीय टीम विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में पहले स्थान के लिए दावेदारी मजबूत कर दी। लगातार दो बार विश्व टेस्ट चैंपिशनशिप का फाइनल खेलने के बाद टीम इंडिया इस बार भी टेस्ट चैंपिशनशिप फाइनल खेलने के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है। इस सीरीज को भारतीय टीम ने भले ही 4-1 से अपने नाम कर लिया हो लेकिन इस टेस्ट सीरीज और पिछले कुछ सालों में घर पर खेले गए टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम की एक कमी तेजी से उजागर हुई है।

ऐसी कमी उजागर हुई है जिसमें कभी भारतीय टीम को महारत हासिल थी। पिछले कुछ सालों में भारतीय टीम स्पिन खेलने में फिसड्डी साबित हुई है। भारतीय टीम को भारत में ही स्पिन खेलने में अब परेशानी होने लगी है। जबकि पहले यही भारतीय टीम के जीत का मंत्रा था। विदेशी टीमें के खिलाफ स्पिन ट्रैक तैयार करके उनके चारों खाने चित कर देते थे। अब ऐसा हो गया है कि विदेशी टीमें भारत का दौरा करती है तब दो-तीन अच्छे स्पिनर को शामिल कर भारतीय टीम को परेशान कर देती है। यहां आने के बाद उनके एवरेज गेंदबाज भी शानदार गेंदबाज बन जाते हैं।

जबकि पहले भारतीय टीमों ने घरेलू और उपमहाद्वीपीय परिस्थतियों में स्पिन के अनुकूल पिचों में शानदार बल्लेबाजी की है। हालांकि अभी वर्तमान में भारतीय टीम स्पिन का सामना करने में पूरी तरह से जुझते नजर आती हैं। भारतीय टीम की गेंदबाजी भारत में शुरू से ही बेहतरीन रही है। अभी यह और मजबूत हो गई है जबकि बल्लेबाजी में स्पिन खेलने की कला में कमी देखने को मिली है।

70 के दशक में भारत की स्पिन चौकड़ी

भारतीय टीम जो कभी 70 के दशक में अपनी स्पिन गेंदबाजी से विरोधियों को परेशान किया करते थी। वहीं आज के समय में हमारे बल्लेबाज परेशान हो जाते हैं। 70 के दशक में इराप्पल्ली प्रसन्ना, बीएस चन्द्रशेखर, वेंकट राघवन और बिशन सिंह बेदी की प्रसिद्ध चौकड़ी थी, जो भारतीय पिचों पर विदेशी टीमों के खिलाफ हावी रहती थी। इन लोगों ने विदेशी बल्लेबाजों के मन में इतना डर बना दिया था कि भारत का दौरा करने वाली टीमें एक महीना पहले से ही स्पिन खेलने का अभ्यास शुरू कर देती थी लेकिन फिर भी इनकी चौकड़ी बल्लेबाजों को कुछ खास करने का मौका नहीं देती थी।

उसके बाद 1980 से लेकर 2010 तक भारतीय टीम के पास ऐसे बल्लेबाज थे जो भारत में ही नहीं बाहर भी जाकर अपनी छाप छोड़ी। कुछ ऐसे बल्लेबाज भी थे, जिन्हें घर पर स्पिन खेलने में महारत हासिल थी और अगर विदेश का दौरा करे तो स्विंग और पेस खेलने में भी माहिर थे। उस दौरान भारत में कई ऐसे दिग्गज स्पिनर भी आएं, जिन्होंने पूरी दूनिया में अपनी छाप छोड़ी लेकिन भारतीय बल्लेबाजों के आगे नतमस्तक हो गए। शेन वार्न से लेकर मुथैया मुरलीधरन तक कई ऐसे दिग्गज भी आएं लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने उन दिग्गज स्पिनरों का डटकर सामना किया और स्पिन खेलने की कला भी दुनिया को दिखाई।

हमारी ताकत ही बनी कमजोरी

आखिरी पिछले कुछ समय में ऐसा क्या हो गया कि जो हमारी ताकत थी, वही हमारी कमजोरी बन गई। भारतीय खिलाड़ी जो स्पिन के अनुकूल पिचों पर खेलकर बड़े हुए हैं लेकिन आज वही बल्लेबाज स्पिन का ढंग से सामना नहीं कर पा रहे हैं। जहां विकेट खराब होने लगती है भारतीय टीम के बल्लेबाजों के पांव क्रीज पर जमते ही नहीं हैं। समय के साथ भारतीय खिलाड़ियों का स्पिन खेलने के लिए जो तकनीक होनी चाहिए, वो धीरे-धीरे खराब होता जा रहा है। अब महेमान टीम को जितना मुश्किल स्पिन खेलने में होती है उतना ही मुश्किल भारतीय टीम को भी स्पिन का सामना करने में होती है।

स्पिन के खिलाफ क्यों संघर्ष कर रहे हैं बल्लेबाज

भारतीय पिचों पर स्पिनरों को खासा फायदा मिलता है। यहां स्पिनरों को विकेट से काफी मदद मिलती है, जिसके कारण भारत में स्पिनर ज्यादा करागर साबित होते हैं। जैसे-जैसे विकेट टूटने लगती है स्पिनरों को टर्न के साथ अधिक उछाल भी मिलने लगती है। अगर गेंदबाज गेंद को ड्रिफ्ट करवाना जानते हैं तब तो बल्लेबाजों को ऐसे गेंदबाज का सामना करने में ज्यादा ही कठिनाई आती है। क्योंकि ऐसे गेंदबाज पिच से अधिक फायदा लेने में कामयाब रहते हैं और बल्लेबाजों को खूब परेशान करते हैं।

भारत में विकेट सूखी और धीमी होती है साथ ही साथ विकेट में असमतल उछाल के साथ गेंद भी तेजी से टर्न होता है। ऐसी विकेटों पर खेलने के लिए बल्लेबाजों को अधिक सतर्कता दिखाने की जरूरत होती है। जिसके लिए बल्लेबाजों को स्पिन खेलने की कला बखूबी आनी चाहिए। स्पिन खेलने में परेशानी के कारण बल्लेबाज स्ट्राइक रोटेट नहीं कर पाते हैं। जिसके कारण भी स्पिनर्स बल्लेबाजों पर हावी हो जाते हैं। जब कोई एक बल्लेबाज ओवर की 6 गेंदें खुद खेलता है तब उसके आउट होने की संभावना भी ज्यादा होती है। इसलिए ऐसा कहा जाता था कि आप स्ट्राइक रोटेट करते रहें जिससे गेंदबाज को परेशानी हो, बल्लेबाज को नहीं।

विदेशी स्पिनर ने किया परेशान

पिछले 10-15 सालों में भारत में डेब्यू करने वाले विदेशी स्पिनर ने भारतीय बल्लेबाजों को मुश्किल में डाला है। 2008 में जब ऑस्ट्रेलिया की टीम भारत का दौरा करने आई थी तब जेसन क्रेजा ने अपने डेब्यू मुकाबले के पहली पारी में 8 और दूसरी पारी में 4 विकेट चटकाए थे। उसके बाद से विदेशी स्पिनर भारतीय बल्लेबाजों पर हावी होने लगे। अगर ऑस्ट्रेलिया के स्टीव ओ कैफी की बात करें तो उन्होंने 2021 में भारत का दौरा करते हुए दोनों पारी में 6-6 विकेट लिए थे। वहीं मैट कुहनैमन ने 5 विकेट लेकर भारतीय टीम को बता दिया था कि स्पिन खेलने की कला अब आपके पास उतनी अच्छी नहीं रही।

उसके बाद न्यूजीलैंड के एजाज पटेल ने एक पारी में 10 विकेट लेने का कारनामा भी भारत के खिलाफ भारत में ही किया। उन्होंने उस मैच में कुल 14 विकेट चटकाए। वहीं टॉड मर्फी ने 2023 में डेब्यू करते हुए एक पारी में 5 विकेट चटकाए। अब इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले ही मैच में टॉम हर्टली ने डेब्यू करते हुए एक पारी में 7 विकेट चटकाए। उसके बाद शोएब बशीर ने इस टेस्ट सीरीज के चौथे और पांचवें मुकाबले में पांच-पांच विकेट चटकाए। इस सीरीज में इंग्लैंड के टॉम हार्टली ने कुल 22 विकेट चटकाए। इन 10-15 सालों में विदेशी स्पिनर ने भारत में आकर भारतीय टीम को ही परेशान किया है।

बल्लेबाज तकनीक पर नहीं कर पाते हैं काम

अब सालभर लगातार ही पूरे विश्व में क्रिकेट खेला जाता है। ऐसे में इंटरनेशनल क्रिकेटरों को अपनी कमियों पर काम करने का मौका भी बहुत कम मिलता है। अब जो भारतीय क्रिकेटर इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने लगते है वो घरेलू क्रिकेट में भाग नहीं लेते हैं। जिस कारण से उन्हें घरेलू गेंदबाज या स्पिनर को खेलने का कम मौका मिलता है। इसके अलावा अब बल्लेबाज गेंदबाज के साथ कम और बॉलिंग मशीन के साथ ज्यादा दिखते हैं। बॉलिंग मशीन के साथ बल्लेबाज घंटों अभ्यास करते हैं। वहीं लगातार क्रिकेट होने के कारण सीमित ओवरों में बल्लेबाज स्पिनर पर ज्यादा अटैकिंग रुख अपनाते हैं और रन बनाने की कोशिश करते रहते हैं। फील्ड रिस्ट्रिक्शन होने के कारण बल्लेबाजों की कमियों का पता नहीं चलता है। जैसे ही यही बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट खेलते हैं उनकी कमियां साफ नजर आने लगती है।

गेंदबाज भी अब पहले जितना अभ्यास नहीं करते हैं। तीन फॉर्मेट में अपने आप फिट रखने के लिए गेंदबाज नेट में भी काफी कम समय व्यतीत करते हैं। जिस कारण से भी बल्लेबाजों को अपनी कमियों के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं चलता है। लगातार मैचेज के कारण गेंदबाज अब ज्यादातर अपने फिटनेस पर ध्यान देते हैं। जिससे वो ज्यादा से मैच खेल पाएं। इस कारण से अब ज्यादातर बल्लेबाजों को नेट गेंदबाज ही अभ्यास कराते नजर आते हैं।

घरेलू क्रिकेट में स्पिनर अब उतने करागर नहीं

अब बात यह भी है कि अब घरेलू क्रिकेट में उतने अच्छे स्पिनर भी नहीं रह गए हैं जो बल्लेबाजों को ज्यादा परेशान कर सके। पहले घरेलू क्रिकटे में एक से बढ़कर एक स्पिनर हुआ करते थे। जो इंटरनेशनल क्रिकेट के साथ-साथ घरेलू क्रिकेट को भी तवज्जो देते थे, लेकिन अब ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। अब लगातार मैचेज रहने के कारण इंटरनेशनल क्रिकेटर घरेलू में शामिल नहीं हो पाते है जिस कारण से अब बल्लेबाजों को क्वालिटी के स्पिनर नहीं मिलते हैं। इस कारण से भी अब घरेलू क्रिकेट में स्पिनर उतने करागर साबित नहीं होते हैं। अच्छे स्पिनर के नहीं होने के कारण बल्लेबाजों की कमियां नजर नहीं आती है।

स्पिन खेलने की बढ़िया तकनीक क्या है…

स्पिन को खेलने के लिए सबसे अच्छा उपाय है कि आपके कदम चलते रहें। आप फ्रंटफूट और बैकफूट का इस्तेमाल अच्छे ढंग से करें। कुछ बल्लेबाज टर्न कम करने के लिए निकलकर खेलते है और कुछ बल्लेबाज गेंद को टर्न होने के बाद खेलना पंसद करते हैं। अगर आप ऐसे स्पिन को खेलोंगे तब सफलता आपको मिलेगी। स्पिनर के खिलाफ अगर आप फंस गए तब गेंदबाज आपको निश्चित तौर पर आउट कर देगा। इसके अलावा आपके हाथ सॉफ्ट होने चाहिए ताकि आसपास लगे फील्डर के पास गेंद नहीं जानी चाहिए। टेस्ट क्रिकेट में कुछ इस ढंग से स्पिन खेलकर आप अच्छे स्पिनर का सामना कर सकते हैं।

लेखक: उज्जवल कुमार सिन्हा

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पटना जिला क्रिकेट लीग दिसंबर के दूसरे सप्ताह से होगी शुरू, 28-29 नवंबर को खिलाड़ियों का रजिस्ट्रेशन

पटना। पटना जिला क्रिकेट संघ की प्रबंधकीय कमेटी की बैठक में सत्र 2026-27 की जिला क्रिकेट लीग दिसंबर के दूसरे सप्ताह से शुरू कराने का निर्णय लिया गया. खिलाड़ियों के रजिस्ट्रेशन फॉर्म 28 और 29 नवंबर को जमा किए जाएंगे. बैठक की अध्यक्षता संघ के अध्यक्ष प्रवीण कुमार प्रणवीर ने विंध्यवासिनी कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, आरके भट्टाचार्य रोड स्थित संघ कार्यालय में की.

संघ के सचिव सुनील कुमार उर्फ सुनील रोहित ने बताया कि आगामी सत्र की तैयारियां शुरू कर दी गयी हैं. बैठक के बाद विभिन्न क्लबों के बीच रजिस्ट्रेशन फॉर्म का वितरण भी किया गया. खिलाड़ियों के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिसंबर के दूसरे सप्ताह से लीग मुकाबले शुरू होंगे.

तदर्थ कमेटी की कार्यप्रणाली पर जतायी नाराजगी

बैठक में बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) की ओर से गठित तथाकथित तदर्थ पटना जिला क्रिकेट संघ (पीडीसीए) की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जतायी गयी. बैठक में शामिल पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि क्लबों के मामले में फर्जीवाड़ा किया जा रहा है. उन्होंने इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की.

पटना जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष प्रवीण कुमार प्रणवीर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के चुनाव और जिला क्रिकेट संघों की व्यवस्था में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में गड़बड़ी के कारण बीसीए का वर्ष 2025 का चुनाव रद्द किया गया है और जिला संघों में मनमाने तरीके से गठित तदर्थ कमेटियों को भी अवैध माना गया है.

नए सिरे से होंगे जिला संघों के चुनाव

प्रवीण कुमार प्रणवीर के अनुसार, बिहार क्रिकेट एसोसिएशन और राज्य के जिला क्रिकेट संघों में नए सिरे से चुनाव कराये जाने हैं. बीसीए के संचालन और चुनाव प्रक्रिया के लिए पटना हाइकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अश्वनी कुमार सिंह को प्रशासक नियुक्त किये जाने की बात भी बैठक में कही गयी.

उन्होंने बताया कि चुनाव प्रक्रिया के तहत जिला क्रिकेट संघों से संबद्ध क्लबों का सत्यापन किया जाएगा. इसके बाद मतदाता सूची तैयार कर जिला संघों के चुनाव कराये जाएंगे. जिला संघों की चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद बिहार क्रिकेट एसोसिएशन का चुनाव कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि पटना जिला क्रिकेट संघ की वर्ष 2023 में निर्वाचित प्रबंधकीय कमेटी इस प्रक्रिया में प्रशासक को पूरा सहयोग देगी.

खिलाड़ियों के चयन पर रोक नहीं

बैठक में बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के प्रशासक की ओर से जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का भी उल्लेख किया गया. संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, एसओपी में स्पष्ट किया गया है कि निर्वाचित या समानांतर जिला क्रिकेट संगठन से जुड़े इच्छुक खिलाड़ी बीसीए की विभिन्न श्रेणियों में होने वाले चयन ट्रायल में हिस्सा ले सकते हैं. ऐसे खिलाड़ियों के चयन प्रक्रिया में शामिल होने पर कोई रोक नहीं है.

बैठक में जिला क्रिकेट लीग की तैयारियों, खिलाड़ियों के पंजीकरण और क्लबों से जुड़े विषयों पर चर्चा की गयी. बैठक के बाद उपस्थित क्लबों को रजिस्ट्रेशन फॉर्म उपलब्ध कराये गये, ताकि आगामी सत्र की प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके.

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बिहार फुटबॉल एसोसिएशन का चुनाव एवं वार्षिक आम सभा पटना में सफलतापूर्वक संपन्न; जय बहादुर सिंह अध्यक्ष निर्वाचित

पटना, 25 अक्टूबर 2026: बिहार फुटबॉल एसोसिएशन (BFA) का चुनाव एवं उसके पश्चात वार्षिक आम सभा (AGM) का आयोजन 25 अक्टूबर 2026 को पटना में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह प्रक्रिया अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) द्वारा प्रतिनियुक्त अधिकारियों की देखरेख में संपन्न हुई।

चुनाव प्रक्रिया निर्वाचन पदाधिकारी श्री बैजू नाथ कुमार सिंह के पर्यवेक्षण में तथा AIFF द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक श्री हरेंद्र स्वैन के सहयोग से निर्धारित निर्वाचन प्रक्रिया के अनुसार संपन्न कराई गई।

चुनाव की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद बिहार फुटबॉल एसोसिएशन के संचालन एवं विकास की जिम्मेदारी निम्नलिखित निर्वाचित पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी समिति के सदस्यों को सौंपी गई।

नव निर्वाचित पदाधिकारी

अध्यक्ष: श्री जय बहादुर सिंह (एनआईएस कोच एवं पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी)
उपाध्यक्ष: श्री अश्विनी खत्री
उपाध्यक्ष: श्री विकास कुमार (गोल्डी)
महिला उपाध्यक्ष: सुश्री प्रीति
कोषाध्यक्ष: श्री सत्येंद्र कुमार (पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी)

कार्यकारिणी समिति के सदस्य

  • श्री शंकर कुमार सिंह
  • श्री दिवाकर कुमार (राष्ट्रीय रेफरी)
  • श्री राजीव कुमार रंजन
  • श्री सुनील कुमार प्रसाद
  • सुश्री पूजा जायसवाल
  • श्री चंदन कुमार सिंह
  • श्री संजय कुमार दयाल (SOM, पूर्व भारतीय खिलाड़ी)
  • सुश्री मधु कुमारी (SOM महिला, पूर्व भारतीय खिलाड़ी)
  • श्री संजीव कुमार (SPA, प्रतिष्ठित राष्ट्रीय खिलाड़ी)
  • सुश्री नेहा (SPA महिला, प्रतिष्ठित राष्ट्रीय खिलाड़ी)

महासचिव, सचिव एवं संयुक्त सचिवों की नियुक्ति
नवगठित आम सभा के गठन के पश्चात वार्षिक आम सभा की बैठक आयोजित की गई। बैठक में एसोसिएशन के सुचारु संचालन तथा बिहार में फुटबॉल के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निम्नलिखित पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई।

महासचिव: श्री श्याम बाबू सिंह
सचिव: श्री संतोष कुमार सिंह
संयुक्त सचिव:
श्री मनोज कुमार
श्री भवेश कुमार सिंह

बैठक में बिहार में फुटबॉल प्रशासन को सुदृढ़ करने, जिला फुटबॉल संघों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने, जमीनी स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देने तथा युवा एवं उभरते खिलाड़ियों को अधिक अवसर उपलब्ध कराने के प्रति एसोसिएशन की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

नवनिर्वाचित नेतृत्व ने राज्य में फुटबॉल प्रतिभाओं की पहचान एवं उन्हें निखारने, संगठनात्मक ढाँचे को मजबूत करने, जमीनी स्तर पर फुटबॉल के विस्तार तथा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में बिहार की भागीदारी एवं प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।

बिहार फुटबॉल एसोसिएशन को विश्वास है कि नवगठित नेतृत्व के मार्गदर्शन में राज्य में फुटबॉल के विकास को नई गति मिलेगी। एसोसिएशन पारस्परिक सहयोग, पारदर्शिता, प्रभावी प्रशासन तथा राज्य के प्रत्येक क्षेत्र में फुटबॉल के समग्र विकास को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ेगा।

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आरव का ऑलराउंड प्रदर्शन, करुणा ने 77 रन से जीता मैच

पटना। बल्ले से अर्धशतक और गेंद से तीन विकेट। करुणा क्रिकेट एकेडमी के आरव कुमार चंद्रा ने अपने ऑलराउंड प्रदर्शन से द्वितीय विमला देवी मेमोरियल इंटर स्कूल अंडर-13 क्रिकेट टूर्नामेंट में शनिवार को टीम को शानदार जीत दिलाई। सीएबी ग्राउंड पर खेले गए प्री-क्वार्टरफाइनल मुकाबले में करुणा क्रिकेट एकेडमी ने मंत्रा स्पोटर्स एकेडमी को 77 रन से हराकर अगले दौर में प्रवेश किया।

सरदार पटेल स्पोटर्स फाउंडेशन की देखरेख में आयोजित टूर्नामेंट में टॉस जीतकर मंत्रा ने करुणा को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। करुणा ने निर्धारित 21 ओवर में नौ विकेट पर 148 रन बनाए। ओपनर आरव कुमार चंद्रा ने 54 गेंदों पर आठ चौकों की मदद से नाबाद 53 रन की पारी खेली। कप्तान शुभम ने 23 और आदित्य राज ने 18 रन बनाए। टीम के खाते में अतिरिक्त के रूप में 34 रन जुड़े। मंत्रा की ओर से आर्यन शंकर, आदित्य आनंद, अभिमान और रुद्रांश राय ने दो-दो विकेट लिए।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी मंत्रा स्पोटर्स एकेडमी की टीम 12.3 ओवर में 71 रन पर सिमट गई। अभिमान ने सर्वाधिक 25 रन बनाए, जबकि अन्य बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा नहीं छू सके। आरव ने गेंदबाजी में भी शानदार प्रदर्शन करते हुए दो ओवर में आठ रन देकर तीन विकेट चटकाए। रौनक ने दो, जबकि आदित्य राज और अभिषेक कुमार यादव ने एक-एक विकेट लिया। शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए आरव कुमार चंद्रा को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

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अल्फा अंडर-14 कप के फाइनल में गोल क्रिकेट एकेडमी और पटना-11

पटना। अल्फा अंडर-14 कप 2026 के सेमीफाइनल मुकाबलों में गोल क्रिकेट एकेडमी और पटना-11 ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह बना ली। शुक्रवार को बलुआ स्थित अल्फा स्पोर्ट्स एकेडमी में खेले गये मुकाबलों में गोल क्रिकेट एकेडमी ने टर्फ एरिना को 100 रनों से हराया, जबकि पटना-11 ने अल्फा क्रिकेट एकेडमी, कंकड़बाग को आठ विकेट से पराजित किया। पहले सेमीफाइनल में शिवम सम्राट ने नाबाद शतक जड़ा, वहीं दूसरे मुकाबले में आयुष कुमार ने गेंद और बल्ले दोनों से दमदार प्रदर्शन किया।

शिवम सम्राट का शतक, गोल क्रिकेट एकेडमी की बड़ी जीत

पहले सेमीफाइनल में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए गोल क्रिकेट एकेडमी ने निर्धारित 20 ओवर में दो विकेट पर 206 रन बनाये। शिवम सम्राट ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 100 रनों की शतकीय पारी खेली। रजनीश रंजन ने नाबाद 55 रन बनाये, जबकि अरसलान जकी खान ने 23 रनों का योगदान दिया। इस तरह टर्फ एरिना के सामने जीत के लिए 207 रनों का लक्ष्य था।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी टर्फ एरिना की टीम गोल क्रिकेट एकेडमी की सधी हुई गेंदबाजी के सामने टिक नहीं सकी और 18.3 ओवर में 106 रनों पर ऑलआउट हो गयी। कप्तान आकाश एमएस ने सर्वाधिक 52 रन बनाये, लेकिन उन्हें दूसरे बल्लेबाजों से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। गोल क्रिकेट एकेडमी की ओर से पीयूष शर्मा ने 22 रन देकर चार विकेट झटके। आदर्श कुमार ने तीन और मधुकांत पांडेय ने दो विकेट लेकर टीम की जीत आसान कर दी। गोल क्रिकेट एकेडमी ने 100 रनों से मुकाबला अपने नाम कर फाइनल में प्रवेश किया।

आयुष कुमार का ऑलराउंड प्रदर्शन, पटना-11 फाइनल में

दूसरे सेमीफाइनल में पटना-11 ने अल्फा क्रिकेट एकेडमी, कंकड़बाग को आठ विकेट से हराकर खिताबी मुकाबले में जगह बनायी। पहले बल्लेबाजी करते हुए अल्फा क्रिकेट एकेडमी ने 20 ओवर में आठ विकेट पर 137 रन बनाये। आकर्ष राज ने 44 रन की पारी खेली, जबकि विवेक कुमार ने 26 और अक्षत अवि ने 24 रन बनाये।

पटना-11 की ओर से आयुष कुमार ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 13 रन देकर तीन विकेट हासिल किये। स्पर्श ने भी दो विकेट लेकर विपक्षी टीम को बड़ा स्कोर बनाने से रोका। 138 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पटना-11 की टीम ने 17.3 ओवर में दो विकेट खोकर 138 रन बना लिये। आयुष कुमार ने बल्लेबाजी में भी कमाल दिखाया और 72 रनों की नाबाद पारी खेली। उनकी पारी में आठ चौके और तीन छक्के शामिल रहे। स्पर्श ने 42 गेंदों पर 41 रन बनाकर उनका अच्छा साथ दिया। पटना-11 ने आठ विकेट से जीत दर्ज कर फाइनल में अपनी जगह पक्की की।

दोनों सेमीफाइनल में जीत के साथ गोल क्रिकेट एकेडमी और पटना-11 ने अल्फा अंडर-14 कप 2026 के फाइनल में प्रवेश कर लिया।

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