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Rinku Singh पर कभी बीसीसीआई ने लगाया था बैन, अब गुजरात टाइटंस के खिलाफ लगातार पांच छक्का जड़कर रातों-रात बनें स्टार; जानें कैसा रहा है रिंकू सिंह का सफर

आईपीएल 2023 (IPL 2023) का आगाज हो चुका है। शुरुआत के कुछ मैच में ही आईपीएल का रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया है। इस आईपीएल में एक ऐसे खिलाड़ी ने अपनी गाथा लिखी है, जिसकी चर्चो पूरे विश्व क्रिकेट में शुरू हो गई है। यह खिलाड़ी कोई और नहीं रिंकू सिंह (Rinku Singh) है। जिन्होंने पांच गेंदों पर पांच छक्के जड़कर कोलकाता नाइट राइडर्स को जीत दिला और रातों-रात हीरो बन गए। उत्तर प्रदेश का यह सितारा जो आईपीएल 2023 में अपनी चमक बिखेर रहा है।

रिंकू सिंह ने पांच छक्का लगाकर मैच को पूरी तरह से पलट दिया और गुजरात टाइटंस को हराकर मुकाबले को जीत लिया। पांच गेंदों पर पांच छक्कें जड़ने के बाद रिंकू ने अपना नाम क्रिकेट इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज करा लिया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रिंकू सिंह ने जो मुकाम हासिल की वो काफी संघर्षों से भरा रहा है। उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में अपने आप को निखरा है और आज यह मुकाम हासिल कर पाए हैं। आइए जानते हैं कैसे रिंकू सिंह बने सिक्सर किंग।

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ रिंकू सिंह का जन्म

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में 12 अक्टूबर 1997 को जन्में रिंकू सिंह का पढ़ाई में कुछ खास लगाव नहीं था। रिंकू के पिता चंद्र सिंह एलपीजी सिलेंडर बांटने का काम करते है। सिलेंडर डिलीवरी का काम करने वाले चंद्र सिंह का घर दो कमरों तक ही सिमिट था। रिंकू को बचपन से पढ़ाई में मन नहीं लगता था। बल्कि इससे उल्टा रिंकू का मन खेल में हमेशा लगा रहता था। इसके बावजूद भी रिंकू के माता-पिता ने कभी भी रिंकू को स्कूल भेजना बंद नहीं किया।

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रिंकू सिंह ने 10 से 11 साल में क्रिकेट को अच्छी तरह से समझ लिया था। रिंकू अपना अधिक समय क्रिकेट को देने लगे थे। रिंकू सिंह अपने पांच भाई-बहनों के साथ गोदाम के परिसर में दो रूम के कमरें में रहते थे। रिंकू सिंह बचपन से गरीबी के माहौल मे पले बढ़े। पिता गैस डिलीवरी का काम करते थे तो वहीं सबसे बड़ा भाई ऑटो रिक्शा चलाता था। जबकि उनका एक बड़ा भाई एक कोचिंग सेंटर में काम करता था।

कठिनाइयों से परिवार का पेट पालने वाले पिता ने रिंकू के कौशल को नहीं पहचाना

कठिनाइयों से परिवार का पेट पालने वाले पिता में इतनी समझ नहीं थी कि अपने बच्चों के कौशल को पहचान कर उन्हें सही रास्ता दिखाए। पढ़ाई में कमजोर होने के कारण के रिंकू का मन खेल से मानों लग सा गया था। जिससे उनके पिता हमेशा नाराज ही रहते थे। रिंकू के क्रिकेटर बनने की बात पर पिता ने कई बार नाराज होकर उनकी पिटाई भी की ऐसा सिर्फ उन्होंने परेशानी में किया।

एक पिता का ख्वाब होता है कि बेटा किसी तरह कुछ करके कमाने लग जाए। इसके अलावा रिंकू कहते है कि क्रिकेट खेलने के लिए उनको समर्थन भी घरवालों से मिला। जिससे मुझे उस जगह तक पहुंचने में मदद मिली, आज मैं जहां भी हूं।

Rinku Singh With His Family

रिंकू के पिता घर परिवार देखकर चलने वाले आदमी थे, उन्हें पता था कि घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। इन सबके बावजूद रिंकू ने 2009 में क्रिकेट खेलने का मन बना लिया था। रिंकू के इसी लगन के कारण वो 2012 में यूपी के टीम में चुने गए। इसके बाद रिंकू सिंह का परिवार एक बार फिर तंगी से झूझने लगा। ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं होने के कारण रिंकू को झाड़ू पोछा लगाने का काम मिला। उन्हें नौकरी तो चाहिए थी लेकिन वह सफाई कर्मी बनने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद उन्होंने मन बना लिया कि अब क्रिकेट में ही कुछ करूंगा।

रिंकू कहते हैं मैं इतना पढ़ा लिखा नहीं हूं कि पढ़ाई के आधार पर काम कर सकूं मैं केवल क्रिकेट ही है जो मुझे आगे बढ़ा सकता है और क्रिकेट के अलावा कोई विकल्प ही नहीं था। क्योंकि परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का कोई और रास्ता ही नहीं था। बड़े भाई की तरह पिता भी हर महीने 6 से ₹7000 कमाते थे। क्रिकेट करियर में उनके परिवार को गरीबी के बोझ से बाहर निकालने में मदद की।

रिंकू सिंह का क्रिकेट करियर

2012 में यूपी के टीम से खेलने के बाद रिंकू सिंह का बेहतरीन प्रदर्शन लगातार जारी रहा। उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उत्तरप्रदेश के अंडर-19 और अंडर-23 टीम में जगह मिली। इसके अलावा उन्होंने अंडर-19 में सेंट्रल जोन का प्रतिनिधित्व भी किया। रिंकू सिंह ने महज 16 साल की उम्र में लिस्ट A  क्रिकेट में डेब्यू किया। उन्होंने पहले ही मैच में शानदार पारी में खेलते हुए 87 गेंदों में 84 रनों की पारी खेली।

सैय्यद मुस्ताक अली ट्रॉफी में 31 मार्च 2014 को विदर्भ के खिलाफ खेलते हुए अपने डेब्यू मैच में ही इन्होने 5 गेंदों पे तूफानी अंदाज़ में बल्लेबाजी करते हुए तीन चौकों और दो गगनचुम्बी छक्कों की मदद से 24 रन बना दिए और दूसरी पारी में गेंदबाजी करते हुए उन्होंने 3 ओवर में 46 रन देकर एक विकेट भी लिया। इसके बाद उन्होंने 5 नवंबर 2016 को 18 वर्ष की उम्र में 2016-17 की रणजी ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश के लिए प्रथम श्रेणी में पदार्पण किया।

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इनके अच्छे प्रदर्शन का फायदा इन्हें आईपीएल के 2017 के सीजन में मिला। जब किंग्स एलेवेन पंजाब ने रिंकू सिंह को 10 लाख के बेस प्राइस पर खरीदा। लेकिन उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। इसके बाद 2018 के विजय हज़ारे ट्रॉफी के एक मैच में त्रिपुरा के विरूद्ध ताबड़तोड़ अंदाज़ में बल्लेबाजी करते हुए 44 गेंद में नाबाद 91 रन बनाये और इसकी मदद से उन्हें 2018 में कोलकाता नाईट राइडर्स की टीम ने उन्हें 80 लाख रुपये में खरीदा। 2018 में रिंकू का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था।

2018 में अपने ख़राब प्रदर्शन के बाद रिंकू सिंह ने कोलकाता के बैटिंग मेंटर अभिषेक नायर के साथ समय बिताया और इसका फायदा उन्हें 2018-2019 के रणजी सीजन में भी हुआ और उन्होंने 10 पारियों में 953 रन बनाकर टूर्नामेंट के तीसरे सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी रहे जिसमे उन्होंने चार शतक लगाए थे (163*, 149, 149 और 150)।  रणजी ट्रॉफी में रिंकू ने 40 मैचों की 59 परियों में 59.89 की उम्दा औसत से 2875 रन बनाये हैं। रणजी ट्रॉफी में रिंकू का उच्चतम स्कोर 163 रन है।

बीसीसीआई ने 2019 में लगाया था बैन

साल 2019 में बीसीसीआई ने रिंकू सिंह को तीन महीनों का प्रतिबंध लगा दिया था। इस दौरान उनके क्रिकेट के करियर पर ब्रेक लग गया था। रिंकू सिंह ने बिना बीसीसीआई को जानकारी दिए अबुधाबी में एक टी-20 लीग में हिस्सा लिया था। जब इसकी जानकारी बीसीसीआई को लगी तो उन्होंने कड़ा एक्शन लेते हुए तीन महीने का प्रतिबंध लगा दिया। इस घटना के बाद रिंकू सिंह ने ऐसा कभी नहीं करने की ठानी। उसके बाद फिर रिंकू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

आईपीएल 2022 में रिंकू को मौके मिलने शुरू हो गए। पिछले साल रिंकू सिंह ने लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ 15 गेंदों पर 40 रन बनाकर टीम को जीत के दहलीज पर पहुंचा दिए। लेकिन कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम 2 रनों से हार गई। जिसके बाद केकेआर की तरफ से लगातार मौके मिलने शुरू हो गए। जिसके बाद रिंकू के प्रदर्शन में भी निखार आने लगा। आईपीएल 2023 में 5 गेंदों में पांच छक्के जड़कर अपनी एक अलग पहचान बना ली है। इसके साथ ही आईपीएल के इतिहास में पांच लगातार गेंदों में पांच छक्के लगाने वाले पांचवे खिलाड़ी बन गए।

 

Written By- उपासना कुमारी

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Divyang Challenger Trophy 2026 का आगाज 11 फरवरी से, ऊर्जा स्टेडियम में दिखेगा जोश, जज्बा और जुनून का संगम; दर्शकों के लिए खास इनाम की घोषणा

पटना: बिहार दिव्यांग क्रिकेट डेवलपमेंट एसोसिएशन द्वारा आयोजित होने वाली दिव्यांग चैलेंजर ट्रॉफी (Divyang Challenger Trophy) 2026 को लेकर 8 फरवरी को पटना स्थित अंगीठी रेस्टोरेंट एवं बैंक्वेट में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। प्रेस को संबोधित करते हुए बिहार दिव्यांग क्रिकेट डेवलपमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अमितेश कुमार ने बताया कि दिव्यांग चैलेंजर ट्रॉफी 2026 का आयोजन 11 एवं 12 फरवरी 2026 को ऊर्जा स्टेडियम, पटना में किया जाएगा। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में बिहार, मध्य प्रदेश एवं जम्मू-कश्मीर की दिव्यांग क्रिकेट टीमें हिस्सा लेंगी।

दिव्यांग खिलाड़ियों को सशक्त मंच देने की पहल

डॉ. अमितेश कुमार ने कहा कि यह टूर्नामेंट केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि दिव्यांग खिलाड़ियों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और संघर्षशीलता को सम्मान देने का सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में समावेशन, समान अवसर और सकारात्मक सोच को मजबूती प्रदान करते हैं तथा दिव्यांग खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

उद्घाटन, फाइनल और पुरस्कार वितरण का समय घोषित

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान टूर्नामेंट कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा भी की गई। जानकारी देते हुए डॉ. अमितेश कुमार ने बताया कि टूर्नामेंट का उद्घाटन समारोह 11 फरवरी को सुबह 8:00 बजे ऊर्जा स्टेडियम में आयोजित होगा। वहीं फाइनल मुकाबला 12 फरवरी को शाम 6:00 बजे से खेला जाएगा।

फाइनल मैच के बाद रात्रि 9:30 बजे से पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें विजेता, उपविजेता सहित इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाली तीनों टीमों को पुरस्कृत किया जाएगा, ताकि दिव्यांग खिलाड़ियों का जोश, जज़्बा और जुनून निरंतर बना रहे।

दर्शकों के लिए आकर्षक घोषणा

प्रेस वार्ता के दौरान दर्शकों के लिए एक विशेष घोषणा भी की गई, जिसने खेल प्रेमियों में खासा उत्साह भर दिया। डॉ. अमितेश कुमार ने घोषणा करते हुए कहा कि दिव्यांग चैलेंजर ट्रॉफी 2026 के प्रत्येक मैच के दौरान यदि कोई दर्शक बाउंड्री लाइन के बाहर कैच पकड़ता है, तो उसे बिहार दिव्यांग क्रिकेट डेवलपमेंट एसोसिएशन की ओर से ₹200 नकद इनाम प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही आयोजकों ने दर्शकों से बड़ी संख्या में ऊर्जा स्टेडियम पहुँचकर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने की अपील की।

आयोजन सचिव की नियुक्ति

इस अवसर पर अध्यक्ष डॉ. अमितेश कुमार ने बताया कि दिव्यांग चैलेंजर ट्रॉफी 2026 के आयोजन सचिव के रूप में डॉ. प्रभात चंद्रा को नियुक्त किया गया है, जिनकी देखरेख में टूर्नामेंट का सफल संचालन सुनिश्चित किया जाएगा।

बिहार की टीम घोषित

इसके साथ ही दिव्यांग चैलेंजर ट्रॉफी के लिए बिहार टीम की घोषणा भी की गई है। इंटरनेशनल खिलाड़ी धर्मेंद्र कुमार को टीम का कप्तान बनाया गया है। वहीं अभी हाल में भारतीय दिव्यांग टीम के लिए डेब्यू करने वाले जितेंद्र कुमार को उपकप्तान बनाया गया है।

बिहार टीम: धर्मेंद्र कुमार (कप्तान), जितेंद्र कुमार यादव (उपकप्तान), अजय कुमार, नीरज कुमार, अमित कुमार, दीपू कुमार, अंकित कुमार, कैलाश प्रसाद, धर्मेंद्र साह, चंदन कुमार, रामनिवास कुमार, अमित कुमार, अमन कुमार, शौकत अली, अनंत पांडे, रंजन कुमार।

मीडिया बंधुओं को किया गया सम्मानित

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान टूर्नामेंट के प्रचार-प्रसार में सहयोग के लिए मीडिया बंधुओं को भी सम्मानित किया गया, जिस पर आयोजकों ने प्रेस जगत के प्रति आभार व्यक्त किया।

ये रहे उपस्थित पदाधिकारी

इस अवसर पर बिहार दिव्यांग क्रिकेट डेवलपमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अमितेश कुमार, सचिव उज्ज्वल कुमार सिन्हा, संयुक्त सचिव अजय कुमार, कोषाध्यक्ष उदय कुमार, आयोजन सचिव डॉ. प्रभात चंद्रा सहित एसोसिएशन के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्यगण उपस्थित रहे।

आयोजकों ने शहरवासियों, खेल प्रेमियों और मीडिया प्रतिनिधियों से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनें और दिव्यांग खिलाड़ियों के हौसले को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँ।

टूर्नामेंट विवरण (एक नज़र में)

📍 स्थान: ऊर्जा स्टेडियम, पटना
📅 तारीख: 11 एवं 12 फरवरी 2026
🏏 आयोजन: दिव्यांग चैलेंजर ट्रॉफी 2026
⏰ उद्घाटन: 11 फरवरी, सुबह 8:00 बजे
🏆 फाइनल: 12 फरवरी, शाम 6:00 बजे
🎁 पुरस्कार वितरण: 12 फरवरी, रात 9:30 बजे से

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मार्च में होगा अंडर-15 बिहार स्कूल चैंपियनशिप लीग, राज्य के युवा क्रिकेटरों को मिलेगा बड़ा मंच

पटना: बिहार के स्कूली क्रिकेट खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। “बिहार स्कूल चैंपियनशिप लीग (अंडर-15)” का आयोजन मार्च माह में किया जाएगा। यह टूर्नामेंट राज्य के उभरते हुए युवा क्रिकेटरों को अपनी प्रतिभा दिखाने का सुनहरा अवसर प्रदान करेगा।

इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट से पहले ओपन ट्रायल का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बिहार भर से बड़ी संख्या में स्कूली खिलाड़ी भाग लेंगे। ट्रायल के आधार पर चयनित खिलाड़ियों को टीमों में विभाजित कर प्रतियोगिता कराई जाएगी। टूर्नामेंट में कुल 16 टीमें हिस्सा लेंगी, जिनमें प्रत्येक टीम में 15 खिलाड़ी होंगे। ट्रायल कि तिथि जल्द घोषित की जाएगी।

टूर्नामेंट का प्रारूप पूरी तरह पेशेवर रहेगा। 16 टीमों को 4 ग्रुप में बांटा जाएगा। हर टीम लीग चरण में 3 मुकाबले खेलेगी। कुल 27 मैच खेले जाएंगे, जिनमें सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबला शामिल होगा। हर मैच के बाद मैन ऑफ द मैच पुरस्कार दिया जाएगा, जबकि फाइनल मुकाबले में बेस्ट बैट्समैन, बेस्ट बॉलर और मैन ऑफ द सीरीज जैसे विशेष पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे।

आयोजन समिति के सचिव ओपन माइंड बिरला स्कूल के निर्देशक अमित रंजन के अनुसार, इस टूर्नामेंट का उद्देश्य ग्रासरूट स्तर पर क्रिकेट प्रतिभाओं की पहचान करना, उन्हें सही मंच देना और भविष्य के लिए तैयार करना है। बिहार स्कूल चैंपियनशिप लीग खेलों के माध्यम से बच्चों में अनुशासन, टीम भावना और आत्मविश्वास विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

आयोजन समिति ने सभी स्कूलों, खिलाड़ियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे इस टूर्नामेंट में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें और इस आयोजन को सफल बनाएं।

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पटना जिला सीनियर डिवीजन क्रिकेट लीग: लो स्कोरिंग मैच में लक्ष्य इंजीटेक जीता, केएनसीसी को 19 रन से हराया

पटना। अधिकारी मदन मोहन प्रसाद मेमोरियल पटना जिला सीनियर डिवीजन क्रिकेट लीग के अंतर्गत शुक्रवार यानी 6 फरवरी को खेले गए लो स्कोरिंग मुकाबले में कमला नेहरू क्रिकेट क्लब (केएनसीसी) पर लक्ष्य इंजीटेक क्लब की टीम भारी पड़ी और 19 रन की शानदार जीत दर्ज की। विजेता टीम के सूरज ओझा को प्लेयर ऑफ द मैच घोषित किया।

स्थानीय अल्फा स्पोट्र्स एकेडमी के ग्राउंड पर खेले गए मुकाबले में टॉस लक्ष्य इंजीटेक क्लब ने जीता और बल्लेबाजी करने का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए लक्ष्य इंजिटेक की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही और टीम ने शुरुआती ओवरों में नियमित अंतराल पर विकेट गंवाए। हालांकि कप्तान निशांत मोहन ने मोर्चा संभालते हुए तेज तर्रार अंदाज़ में बल्लेबाजी की। उन्होंने मात्र 25 गेंदों पर 39 रन बनाए, जिसमें सात चौके और एक छक्का शामिल था। उनकी इस पारी ने टीम को कुछ हद तक सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

मध्यक्रम में सत्यम संतोष कुमार ने धैर्य के साथ 37 गेंदों पर 25 रन जोड़े, जबकि निचले क्रम में महताब आलम ने नाबाद 23 रन बनाकर पारी को संभाला। लक्ष्य इंजिटेक की पूरी टीम 23 ओवर में 122 रन बनाकर ऑलआउट हो गई। केएनसीसी की ओर से गेंदबाजी में शुभम सिंह ने शानदार प्रदर्शन किया और 7 ओवर में 27 रन देकर 5 विकेट अपने नाम किए। इसके अलावा प्रखर प्रखर ज्ञान ने कसी हुई गेंदबाजी करते हुए 2 विकेट झटके, जबकि कप्तान राहुल रत्न को भी 2 सफलता मिली।

123 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी केएनसीसी की टीम ने संभलकर शुरुआत की, लेकिन लक्ष्य इंजीटेक के गेंदबाजों ने लगातार दबाव बनाए रखा। अनमोल कुमार बोनी ने 23 रन और मंजीत कुमार ने 22 रनों की पारी खेलकर संघर्ष जरूर किया, परंतु अन्य बल्लेबाजों का साथ न मिल पाने से टीम लक्ष्य के करीब नहीं पहुंच सकी। सिमुख ने 19 रन बनाये।

लक्ष्य इंजीटेक की गेंदबाजी में सूरज ओझा ने मैच का रुख पलट दिया। उन्होंने 7.5 ओवर में मात्र 16 रन देकर 4 विकेट चटकाए और केएनसीसी की कमर तोड़ दी। वहीं मोहम्मद यासीन ने किफायती गेंदबाजी करते हुए 5 ओवर में 10 रन देकर 3 विकेट हासिल किए। अंतिम ओवरों में लगातार विकेट गिरने से केएनसीसी की पूरी टीम 25.5 ओवर में 103 रन ही बना सकी। इस तरह लक्ष्य इंजिटेक ने मुकाबला 19 रन से अपने नाम किया। इस जीत के साथ टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है और उसने लीग तालिका में अपनी स्थिति को मजबूत कर लिया है।

संक्षिप्त स्कोर
लक्ष्य इंजीटेक: 122/10 (23 ओवर), निशांत मोहन 39,सत्यम कुमार 25, महताब आलम नाबाद 23, शुभम सिंह 5/27, राहुल रत्न 2/49, प्रखर ज्ञान 2/11, अक्षत मिश्रा 1/15,

केएनसीसी: 103/9 (25.5 ओवर), अनमोल कुमार बोनी 23, मंजीत कुमार 22, सिमुख 19, प्रखर ज्ञान 16, विक्की आनंद 10,सूरज ओझा 4/16, मोहम्मद यासीन 3/10, उत्तम कुमार 1/21, आदित्य कुमार 1/25

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लक्ष्मण सिंह स्मृति स्कूली क्रिकेट टूर्नामेंट का खिताबी भिड़ंत दबंग व थंडरबोल्ट के बीच रविवार को

पटना: लक्ष्मण सिंह स्मृति स्कूली क्रिकेट टूर्नामेंट को उसके दोनों फाइनलिस्ट मिल गए हैं। खेले गए सेमीफाइनल मुकाबलों में दबंग ने चैंपियंस को 13 रन से हराकर जहां खिताबी मुकाबले में जगह बनाई, वहीं दूसरे सेमीफाइनल में थंडरबोल्ट ने लायंस को एक विकेट से मात देकर फाइनल का टिकट कटाया। अब रविवार को श्रीकृष्णा खेल मैदान, खेमनीचक, पटना में दबंग और थंडरबोल्ट के बीच खिताबी भिड़ंत होगी।

दबंग की जीत का सिलसिला बरकरार

पहले सेमीफाइनल में चैंपियंस ने टॉस जीतकर दबंग को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। दबंग के बल्लेबाजों ने इस मौके को शानदार प्रदर्शन में बदला। आदर्श राज ने 66 रनों की शानदार पारी खेली, जबकि रूणित सिन्हा ने 34 और युगवीर यादव ने 22 रन का अहम योगदान दिया। दबंग ने निर्धारित 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 161 रन बनाए।

जवाब में खेलने उतरी चैंपियंस की टीम लक्ष्य के करीब तो पहुंची, लेकिन जीत से चूक गई। पूरी टीम 20 ओवर में 8 विकेट पर 148 रन ही बना सकी। इस पारी में अतिरिक्त 51 रन चैंपियंस के स्कोर का बड़ा हिस्सा रहे। दबंग की ओर से हर्ष राज (4/26) और पियूष राज (2/20) ने शानदार गेंदबाजी की। हरफनमौला प्रदर्शन के लिए आदर्श राज को दीपमाला गुप्ता और निशा सिन्हा ने संयुक्त रूप से मैच आफ द मैच का पुरस्कार प्रदान किया।

संक्षिप्त स्कोर
दबंग:20 ओवर में 8 विकेट पर 161 रन, आदर्श राज 66, रूणित सिन्हा 34, युगवीर यादव 22, अतिरिक्त 20। गेंदबाजी: ध्रुव कुमार 1/13, दिव्यांशु 1/29, हरिओम 1/20
चैंपियंस: 20 ओवर में 8 विकेट पर 148 रन, मुन्ना 22, ध्रुव 16, विनीत 15, अतिरिक्त 51। गेंदबाजी: हर्ष राज 4/26, पियूष राज 2/20, आदर्श राज 2/8

थंडरबोल्ट की सांस रोक देने वाली जीत

टूर्नामेंट का दूसरा सेमीफाइनल लायंस और थंडरबोल्ट के बीच खेला गया। टॉस जीतकर थंडरबोल्ट ने लायंस को बल्लेबाजी के लिए बुलाया। लायंस की पूरी टीम 17.3 ओवर में मात्र 87 रन पर सिमट गई। थंडरबोल्ट की ओर से विश्वजीत, अभिनव राज, सुजल राज और हिमांशु ने सटीक गेंदबाजी करते हुए लायंस की कमर तोड़ दी। छोटे लक्ष्य का पीछा करते हुए थंडरबोल्ट की पारी भी आसान नहीं रही। लगातार विकेट गिरने के बावजूद टीम ने 16 ओवर में 9 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। रोमांचक जीत में विश्वजीत के हरफनमौला प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

संक्षिप्त स्कोर
लायंस: 17.3 ओवर में 87 रन पर ऑलआउट, सचिन 22, आर्यन अरविंद सिंह 10, मयंक 10, अतिरिक्त 15। गेंदबाजी: विश्वजीत 2/20, अभिनव राज 2/27, सुजल राज 2/21, हिमांशु 2/9
थंडरबोल्ट: 16 ओवर में 88/9. आयुष 16, श्रेयांश शर्मा 12, नवीन नाबाद 12, अतिरिक्त 25। गेंदबाजी: शिबू भूषण 4/9, सचिन 2/16, मयंक 1/17

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