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Opinion: 4-1 से सीरीज जीतने के बाद भी कुछ सवालों ने किया परेशान, घर में ही स्पिनर्स के सामने टिक नहीं पा रहे हैं भारतीय बल्लेबाज, जानें कहां चूक रहे हैं बल्लेबाज…

Opinion: भारतीय टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ खेली जा रही पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में 4-1 से सीरीज को अपने नाम किया। इस टेस्ट सीरीज को जीतकर भारतीय टीम विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में पहले स्थान के लिए दावेदारी मजबूत कर दी। लगातार दो बार विश्व टेस्ट चैंपिशनशिप का फाइनल खेलने के बाद टीम इंडिया इस बार भी टेस्ट चैंपिशनशिप फाइनल खेलने के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है। इस सीरीज को भारतीय टीम ने भले ही 4-1 से अपने नाम कर लिया हो लेकिन इस टेस्ट सीरीज और पिछले कुछ सालों में घर पर खेले गए टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम की एक कमी तेजी से उजागर हुई है।

ऐसी कमी उजागर हुई है जिसमें कभी भारतीय टीम को महारत हासिल थी। पिछले कुछ सालों में भारतीय टीम स्पिन खेलने में फिसड्डी साबित हुई है। भारतीय टीम को भारत में ही स्पिन खेलने में अब परेशानी होने लगी है। जबकि पहले यही भारतीय टीम के जीत का मंत्रा था। विदेशी टीमें के खिलाफ स्पिन ट्रैक तैयार करके उनके चारों खाने चित कर देते थे। अब ऐसा हो गया है कि विदेशी टीमें भारत का दौरा करती है तब दो-तीन अच्छे स्पिनर को शामिल कर भारतीय टीम को परेशान कर देती है। यहां आने के बाद उनके एवरेज गेंदबाज भी शानदार गेंदबाज बन जाते हैं।

जबकि पहले भारतीय टीमों ने घरेलू और उपमहाद्वीपीय परिस्थतियों में स्पिन के अनुकूल पिचों में शानदार बल्लेबाजी की है। हालांकि अभी वर्तमान में भारतीय टीम स्पिन का सामना करने में पूरी तरह से जुझते नजर आती हैं। भारतीय टीम की गेंदबाजी भारत में शुरू से ही बेहतरीन रही है। अभी यह और मजबूत हो गई है जबकि बल्लेबाजी में स्पिन खेलने की कला में कमी देखने को मिली है।

70 के दशक में भारत की स्पिन चौकड़ी

भारतीय टीम जो कभी 70 के दशक में अपनी स्पिन गेंदबाजी से विरोधियों को परेशान किया करते थी। वहीं आज के समय में हमारे बल्लेबाज परेशान हो जाते हैं। 70 के दशक में इराप्पल्ली प्रसन्ना, बीएस चन्द्रशेखर, वेंकट राघवन और बिशन सिंह बेदी की प्रसिद्ध चौकड़ी थी, जो भारतीय पिचों पर विदेशी टीमों के खिलाफ हावी रहती थी। इन लोगों ने विदेशी बल्लेबाजों के मन में इतना डर बना दिया था कि भारत का दौरा करने वाली टीमें एक महीना पहले से ही स्पिन खेलने का अभ्यास शुरू कर देती थी लेकिन फिर भी इनकी चौकड़ी बल्लेबाजों को कुछ खास करने का मौका नहीं देती थी।

उसके बाद 1980 से लेकर 2010 तक भारतीय टीम के पास ऐसे बल्लेबाज थे जो भारत में ही नहीं बाहर भी जाकर अपनी छाप छोड़ी। कुछ ऐसे बल्लेबाज भी थे, जिन्हें घर पर स्पिन खेलने में महारत हासिल थी और अगर विदेश का दौरा करे तो स्विंग और पेस खेलने में भी माहिर थे। उस दौरान भारत में कई ऐसे दिग्गज स्पिनर भी आएं, जिन्होंने पूरी दूनिया में अपनी छाप छोड़ी लेकिन भारतीय बल्लेबाजों के आगे नतमस्तक हो गए। शेन वार्न से लेकर मुथैया मुरलीधरन तक कई ऐसे दिग्गज भी आएं लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने उन दिग्गज स्पिनरों का डटकर सामना किया और स्पिन खेलने की कला भी दुनिया को दिखाई।

हमारी ताकत ही बनी कमजोरी

आखिरी पिछले कुछ समय में ऐसा क्या हो गया कि जो हमारी ताकत थी, वही हमारी कमजोरी बन गई। भारतीय खिलाड़ी जो स्पिन के अनुकूल पिचों पर खेलकर बड़े हुए हैं लेकिन आज वही बल्लेबाज स्पिन का ढंग से सामना नहीं कर पा रहे हैं। जहां विकेट खराब होने लगती है भारतीय टीम के बल्लेबाजों के पांव क्रीज पर जमते ही नहीं हैं। समय के साथ भारतीय खिलाड़ियों का स्पिन खेलने के लिए जो तकनीक होनी चाहिए, वो धीरे-धीरे खराब होता जा रहा है। अब महेमान टीम को जितना मुश्किल स्पिन खेलने में होती है उतना ही मुश्किल भारतीय टीम को भी स्पिन का सामना करने में होती है।

स्पिन के खिलाफ क्यों संघर्ष कर रहे हैं बल्लेबाज

भारतीय पिचों पर स्पिनरों को खासा फायदा मिलता है। यहां स्पिनरों को विकेट से काफी मदद मिलती है, जिसके कारण भारत में स्पिनर ज्यादा करागर साबित होते हैं। जैसे-जैसे विकेट टूटने लगती है स्पिनरों को टर्न के साथ अधिक उछाल भी मिलने लगती है। अगर गेंदबाज गेंद को ड्रिफ्ट करवाना जानते हैं तब तो बल्लेबाजों को ऐसे गेंदबाज का सामना करने में ज्यादा ही कठिनाई आती है। क्योंकि ऐसे गेंदबाज पिच से अधिक फायदा लेने में कामयाब रहते हैं और बल्लेबाजों को खूब परेशान करते हैं।

भारत में विकेट सूखी और धीमी होती है साथ ही साथ विकेट में असमतल उछाल के साथ गेंद भी तेजी से टर्न होता है। ऐसी विकेटों पर खेलने के लिए बल्लेबाजों को अधिक सतर्कता दिखाने की जरूरत होती है। जिसके लिए बल्लेबाजों को स्पिन खेलने की कला बखूबी आनी चाहिए। स्पिन खेलने में परेशानी के कारण बल्लेबाज स्ट्राइक रोटेट नहीं कर पाते हैं। जिसके कारण भी स्पिनर्स बल्लेबाजों पर हावी हो जाते हैं। जब कोई एक बल्लेबाज ओवर की 6 गेंदें खुद खेलता है तब उसके आउट होने की संभावना भी ज्यादा होती है। इसलिए ऐसा कहा जाता था कि आप स्ट्राइक रोटेट करते रहें जिससे गेंदबाज को परेशानी हो, बल्लेबाज को नहीं।

विदेशी स्पिनर ने किया परेशान

पिछले 10-15 सालों में भारत में डेब्यू करने वाले विदेशी स्पिनर ने भारतीय बल्लेबाजों को मुश्किल में डाला है। 2008 में जब ऑस्ट्रेलिया की टीम भारत का दौरा करने आई थी तब जेसन क्रेजा ने अपने डेब्यू मुकाबले के पहली पारी में 8 और दूसरी पारी में 4 विकेट चटकाए थे। उसके बाद से विदेशी स्पिनर भारतीय बल्लेबाजों पर हावी होने लगे। अगर ऑस्ट्रेलिया के स्टीव ओ कैफी की बात करें तो उन्होंने 2021 में भारत का दौरा करते हुए दोनों पारी में 6-6 विकेट लिए थे। वहीं मैट कुहनैमन ने 5 विकेट लेकर भारतीय टीम को बता दिया था कि स्पिन खेलने की कला अब आपके पास उतनी अच्छी नहीं रही।

उसके बाद न्यूजीलैंड के एजाज पटेल ने एक पारी में 10 विकेट लेने का कारनामा भी भारत के खिलाफ भारत में ही किया। उन्होंने उस मैच में कुल 14 विकेट चटकाए। वहीं टॉड मर्फी ने 2023 में डेब्यू करते हुए एक पारी में 5 विकेट चटकाए। अब इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले ही मैच में टॉम हर्टली ने डेब्यू करते हुए एक पारी में 7 विकेट चटकाए। उसके बाद शोएब बशीर ने इस टेस्ट सीरीज के चौथे और पांचवें मुकाबले में पांच-पांच विकेट चटकाए। इस सीरीज में इंग्लैंड के टॉम हार्टली ने कुल 22 विकेट चटकाए। इन 10-15 सालों में विदेशी स्पिनर ने भारत में आकर भारतीय टीम को ही परेशान किया है।

बल्लेबाज तकनीक पर नहीं कर पाते हैं काम

अब सालभर लगातार ही पूरे विश्व में क्रिकेट खेला जाता है। ऐसे में इंटरनेशनल क्रिकेटरों को अपनी कमियों पर काम करने का मौका भी बहुत कम मिलता है। अब जो भारतीय क्रिकेटर इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने लगते है वो घरेलू क्रिकेट में भाग नहीं लेते हैं। जिस कारण से उन्हें घरेलू गेंदबाज या स्पिनर को खेलने का कम मौका मिलता है। इसके अलावा अब बल्लेबाज गेंदबाज के साथ कम और बॉलिंग मशीन के साथ ज्यादा दिखते हैं। बॉलिंग मशीन के साथ बल्लेबाज घंटों अभ्यास करते हैं। वहीं लगातार क्रिकेट होने के कारण सीमित ओवरों में बल्लेबाज स्पिनर पर ज्यादा अटैकिंग रुख अपनाते हैं और रन बनाने की कोशिश करते रहते हैं। फील्ड रिस्ट्रिक्शन होने के कारण बल्लेबाजों की कमियों का पता नहीं चलता है। जैसे ही यही बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट खेलते हैं उनकी कमियां साफ नजर आने लगती है।

गेंदबाज भी अब पहले जितना अभ्यास नहीं करते हैं। तीन फॉर्मेट में अपने आप फिट रखने के लिए गेंदबाज नेट में भी काफी कम समय व्यतीत करते हैं। जिस कारण से भी बल्लेबाजों को अपनी कमियों के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं चलता है। लगातार मैचेज के कारण गेंदबाज अब ज्यादातर अपने फिटनेस पर ध्यान देते हैं। जिससे वो ज्यादा से मैच खेल पाएं। इस कारण से अब ज्यादातर बल्लेबाजों को नेट गेंदबाज ही अभ्यास कराते नजर आते हैं।

घरेलू क्रिकेट में स्पिनर अब उतने करागर नहीं

अब बात यह भी है कि अब घरेलू क्रिकेट में उतने अच्छे स्पिनर भी नहीं रह गए हैं जो बल्लेबाजों को ज्यादा परेशान कर सके। पहले घरेलू क्रिकटे में एक से बढ़कर एक स्पिनर हुआ करते थे। जो इंटरनेशनल क्रिकेट के साथ-साथ घरेलू क्रिकेट को भी तवज्जो देते थे, लेकिन अब ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। अब लगातार मैचेज रहने के कारण इंटरनेशनल क्रिकेटर घरेलू में शामिल नहीं हो पाते है जिस कारण से अब बल्लेबाजों को क्वालिटी के स्पिनर नहीं मिलते हैं। इस कारण से भी अब घरेलू क्रिकेट में स्पिनर उतने करागर साबित नहीं होते हैं। अच्छे स्पिनर के नहीं होने के कारण बल्लेबाजों की कमियां नजर नहीं आती है।

स्पिन खेलने की बढ़िया तकनीक क्या है…

स्पिन को खेलने के लिए सबसे अच्छा उपाय है कि आपके कदम चलते रहें। आप फ्रंटफूट और बैकफूट का इस्तेमाल अच्छे ढंग से करें। कुछ बल्लेबाज टर्न कम करने के लिए निकलकर खेलते है और कुछ बल्लेबाज गेंद को टर्न होने के बाद खेलना पंसद करते हैं। अगर आप ऐसे स्पिन को खेलोंगे तब सफलता आपको मिलेगी। स्पिनर के खिलाफ अगर आप फंस गए तब गेंदबाज आपको निश्चित तौर पर आउट कर देगा। इसके अलावा आपके हाथ सॉफ्ट होने चाहिए ताकि आसपास लगे फील्डर के पास गेंद नहीं जानी चाहिए। टेस्ट क्रिकेट में कुछ इस ढंग से स्पिन खेलकर आप अच्छे स्पिनर का सामना कर सकते हैं।

लेखक: उज्जवल कुमार सिन्हा

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सॉफ्टबॉल क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार ने किया कमेटी का विस्तार, नितिन कुमार बने उपाध्यक्ष

पटना। सॉफ्टबॉल क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार ने संगठन को मजबूत बनाने और राज्य में सॉफ्टबॉल क्रिकेट के विकास को गति देने के उद्देश्य से अपनी प्रदेश कमेटी का विस्तार किया है। इस क्रम में नितिन कुमार को एसोसिएशन का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि 30 जुलाई से हाजीपुर में आयोजित होने वाली द्वितीय यूथ नेशनल सॉफ्टबॉल क्रिकेट चैंपियनशिप-2026 को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। प्रदेश कमेटी, जिला इकाइयों एवं आयोजन समिति के साथ लगातार समन्वय स्थापित कर प्रतियोगिता की तैयारियों की समीक्षा की जा रही है, ताकि राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता का सफल आयोजन सुनिश्चित किया जा सके।

पदाधिकारियों ने विश्वास जताया कि नितिन कुमार के जुड़ने से संगठन को मजबूती मिलेगी और बिहार में सॉफ्टबॉल क्रिकेट के विस्तार को नई गति प्राप्त होगी। साथ ही राज्य के अधिक से अधिक युवाओं को इस खेल से जोड़ने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी पहल की जाएगी।

नवनियुक्त उपाध्यक्ष नितिन कुमार ने नियुक्ति पर एसोसिएशन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता राज्य के सभी जिलों में सॉफ्टबॉल क्रिकेट को बढ़ावा देना और युवा खिलाड़ियों को बेहतर मंच उपलब्ध कराना होगी। उन्होंने कहा कि सभी पदाधिकारियों और खिलाड़ियों के सहयोग से इस खेल को नई पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि हाजीपुर में आयोजित होने वाली द्वितीय यूथ नेशनल सॉफ्टबॉल क्रिकेट चैंपियनशिप-2026 में देश के विभिन्न राज्यों की टीमें भाग लेंगी। इस आयोजन को लेकर एसोसिएशन ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।

 

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रेयर विंडो कप नाइट क्रिकेट टूर्नामेंट सीजन-2 का भव्य समापन, केटीसीए दीघा बनी चैंपियन

पटना, 19 जुलाई 2026: रेयर विंडो रेस्टोरेंट, बोरिंग रोड, पटना के बैंक्वेट हॉल में आयोजित रेयर विंडो कप नाइट क्रिकेट टूर्नामेंट सीजन-2 का भव्य पुरस्कार वितरण समारोह उत्साह और गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। टूर्नामेंट का आयोजन खुशी टारगेट क्रिकेट अकादमी (KTCA), दीघा द्वारा किया गया।

फाइनल मुकाबले में मिथिला क्रिकेट अकादमी ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए केटीसीए दीघा ने निर्धारित 15 ओवर में 8 विकेट खोकर 101 रन बनाए। टीम की ओर से प्रवीण कुमार सिंह ने शानदार 61 रन बनाए, जबकि अमन ने 23 रनों का योगदान दिया। मिथिला क्रिकेट अकादमी की ओर से अंकित ठाकुर ने 3 विकेट, पार्थ कुमार ने 2 विकेट और सचिन ने 1 विकेट हासिल किया।

102 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी मिथिला क्रिकेट अकादमी की टीम निर्धारित 15 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर केवल 50 रन ही बना सकी। टीम की ओर से मणिकर्णिका ने 21 और सौरव प्रसाद ने 13 रन बनाए। केटीसीए दीघा की ओर से अमन केसरी ने 3 विकेट, जैक बट्टू ने 2 विकेट और प्रवीण कुमार सिंह ने 2 विकेट चटकाए। इस शानदार प्रदर्शन के दम पर केटीसीए दीघा ने 51 रनों से जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया। मैच में शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए प्रवीण कुमार सिंह को मैन ऑफ द मैच चुना गया।

पुरस्कार वितरण समारोह के मुख्य अतिथि बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) की गवर्निंग काउंसिल के संयोजक ज्ञानेश्वर गौतम थे। उनके साथ राहुल पाठक एवं रेयर विंडो के एमडी निहाल राज विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। अतिथियों ने विजेता और उपविजेता टीमों को ट्रॉफी एवं पुरस्कार प्रदान करते हुए खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर टूर्नामेंट के संयोजक मुकेश कुमार को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

समारोह के दौरान क्रिकेट और आयोजन में विशेष योगदान देने वाले कमल कुमार, जितेंद्र जी, छोटू और अजय कुमार को सम्मानित किया गया। टूर्नामेंट के अंपायर कुंदन और हिमांशु, स्कोरिंग एवं तकनीकी सहयोग के लिए राकेश कुमार और पंकज कुमार, लाइव स्ट्रीमिंग पार्टनर तथा प्रेस प्रतिनिधि सुरेश मिश्रा को भी सम्मानित किया गया। महिला क्रिकेट में निरंतर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए हर्षिका और श्रेया को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

प्रमुख पुरस्कार

  • मैन ऑफ द सीरीज: प्रवीण कुमार सिंह (केटीसीए दीघा)
  • सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज (Best Batsman): प्रवीण कुमार सिंह (केटीसीए दीघा)
  • सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज (Best Bowler): अंकित (कमल 11, बेगूसराय)
  • गेम चेंजर अवॉर्ड: अमन केसरी (केटीसीए दीघा)
  • सर्वश्रेष्ठ क्षेत्ररक्षक (Best Fielder): पार्थ कुमार
  • प्रॉमिसिंग प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट: शैलेश, कान्हा एवं ओम

विजेता टीम केटीसीए दीघा को ₹15,000 तथा उपविजेता मिथिला क्रिकेट अकादमी को ₹7,500 की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। इसके साथ ही दोनों टीमों के सभी खिलाड़ियों को सनहिट स्पोर्ट्स ने किट बैग भी दिए गए।

आयोजन समिति ने टूर्नामेंट को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी प्रायोजकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। समिति ने रेयर विंडो, महाकाल ज्वेलर्स, लक्षिका इंडस्ट्रीज तथा गैस्ट्रो एंड इंडोस्कोपी सेंटर को विशेष धन्यवाद दिया। टूर्नामेंट के मीडिया पार्टनर ‘क्रीड़ा न्यूज’ की भी आयोजन को व्यापक पहुंच दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसके लिए समिति ने विशेष आभार व्यक्त किया।

समारोह के अंत में आयोजन समिति ने खिलाड़ियों, अतिथियों, अंपायरों, मीडिया प्रतिनिधियों, सहयोगियों, प्रायोजकों और दर्शकों का धन्यवाद करते हुए भविष्य में टूर्नामेंट को और अधिक भव्य स्तर पर आयोजित करने का संकल्प लिया।

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देव और विवेक के दम पर स्काई स्पोर्ट्स व सीएबी पहुंची सेमीफाइनल में

पटना। सरदार पटेल स्पोर्ट्स फाउंडेशन के तत्वावधान में श्रीकृष्णा क्रिकेट मैदान, खेमनीचक में आयोजित प्लानेट इंटीरियर एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड प्रायोजित 8वें बाबू वीर कुंवर सिंह गोल्ड कप अंडर-13 स्कूल क्रिकेट टूर्नामेंट के क्वार्टरफाइनल मुकाबलों में स्काई स्पोर्ट्स और क्रिकेट एकेडमी ऑफ बिहार (सीएबी) ने शानदार जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

पहले क्वार्टरफाइनल में स्काई स्पोर्ट्स ने श्रीराम खेल मैदान को 93 रन से हराया। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए स्काई स्पोर्ट्स ने 21 ओवर में दो विकेट पर 153 रन बनाए। टीम की ओर से देव ने 59 गेंदों पर 14 चौकों और एक छक्के की मदद से 74 रन की शानदार पारी खेली और प्लेयर ऑफ द मैच बने। आयुष बसौटिया ने नाबाद 25 और सार्थक ने नाबाद 15 रन का योगदान दिया। जवाब में श्रीराम खेल मैदान की टीम 15.4 ओवर में 60 रन पर सिमट गई। स्काई की ओर से मानव ने चार विकेट लेकर जीत में अहम भूमिका निभाई।

दूसरे क्वार्टरफाइनल में क्रिकेट एकेडमी ऑफ बिहार (सीएबी) ने ट्रायम्फैंट सीसी को 18 रन से पराजित किया। पहले बल्लेबाजी करते हुए सीएबी ने 21 ओवर में छह विकेट पर 149 रन बनाए। विवेक कुमार ने 53 गेंदों पर चार चौकों और आठ छक्कों की मदद से नाबाद 88 रन की विस्फोटक पारी खेली और प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए। शिवम सम्राट ने 22 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करते हुए ट्रायम्फैंट सीसी की टीम 21 ओवर में 131 रन पर ऑलआउट हो गई। अभिजीत राज ने 29 और अर्पित राज ने 20 रन बनाए, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके। सीएबी की ओर से राहुल और रेयान झा ने तीन-तीन विकेट लेकर टीम को सेमीफाइनल में पहुंचाया।

संक्षिप्त स्कोर

स्काई स्पोर्ट्स: 21 ओवर में 153/2 (देव 74, आयुष बसौटिया नाबाद 25, सार्थक नाबाद 15, अतिरिक्त 29; अंकुश 1/11, पृथ्वी 1/32)।

श्रीराम खेल मैदान: 15.4 ओवर में 60 ऑलआउट (अतिरिक्त 40; मानव 4/8, बंकू 1/8, अनिल 1/3, मिसाब 1/1, अंश 1/1, सार्थक 1/1)।

क्रिकेट एकेडमी ऑफ बिहार: 21 ओवर में 149/6 (विवेक कुमार नाबाद 88, शिवम सम्राट 22, आदर्श आनंद 15, अतिरिक्त 14; मयंक 2/21, प्रियाशु यादव 2/25, समर 1/52, आदर्श 1/14)।

ट्रायम्फैंट सीसी: 21 ओवर में 131 ऑलआउट (अभिजीत राज 29, अर्पित राज 20, आदित्य राज 20, प्रियांशु यादव 15, दक्ष पांडे 11, समर नाबाद 12, अतिरिक्त 11; राहुल 3/30, रेयान झा 3/15, शुभम 2/19, आर्यन 1/32)।

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रूपक कुमार बने लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व दिल्ली प्रदेश प्रभारी

पटना। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के खेल एवं सांस्कृतिक प्रकोष्ठ ने संगठन को मजबूत बनाने की दिशा में अहम फैसला लेते हुए राष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी एवं इंटरनेशनल बेसबॉल खिलाड़ी रूपक कुमार को राष्ट्रीय महासचिव एवं दिल्ली प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति खेल एवं सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप शंकर शर्मा (लंकेश) ने की।

पार्टी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, रूपक कुमार ने संगठन में अपनी सक्रिय कार्यशैली, अनुशासन, समर्पण और नेतृत्व क्षमता से अलग पहचान बनाई है। संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी और पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी नेतृत्व ने विश्वास जताया है कि उनके अनुभव और कार्यकुशलता से संगठन को नई मजबूती मिलेगी तथा दिल्ली प्रदेश में पार्टी के विस्तार को गति मिलेगी।

नई जिम्मेदारी मिलने पर रूपक कुमार ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व एवं खेल एवं सांस्कृतिक प्रकोष्ठ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन पर जो विश्वास जताया है, उस पर वह पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि संगठन को मजबूत बनाने और पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए वह पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते रहेंगे।

 

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