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Opinion: 4-1 से सीरीज जीतने के बाद भी कुछ सवालों ने किया परेशान, घर में ही स्पिनर्स के सामने टिक नहीं पा रहे हैं भारतीय बल्लेबाज, जानें कहां चूक रहे हैं बल्लेबाज…

Opinion: भारतीय टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ खेली जा रही पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में 4-1 से सीरीज को अपने नाम किया। इस टेस्ट सीरीज को जीतकर भारतीय टीम विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में पहले स्थान के लिए दावेदारी मजबूत कर दी। लगातार दो बार विश्व टेस्ट चैंपिशनशिप का फाइनल खेलने के बाद टीम इंडिया इस बार भी टेस्ट चैंपिशनशिप फाइनल खेलने के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है। इस सीरीज को भारतीय टीम ने भले ही 4-1 से अपने नाम कर लिया हो लेकिन इस टेस्ट सीरीज और पिछले कुछ सालों में घर पर खेले गए टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम की एक कमी तेजी से उजागर हुई है।

ऐसी कमी उजागर हुई है जिसमें कभी भारतीय टीम को महारत हासिल थी। पिछले कुछ सालों में भारतीय टीम स्पिन खेलने में फिसड्डी साबित हुई है। भारतीय टीम को भारत में ही स्पिन खेलने में अब परेशानी होने लगी है। जबकि पहले यही भारतीय टीम के जीत का मंत्रा था। विदेशी टीमें के खिलाफ स्पिन ट्रैक तैयार करके उनके चारों खाने चित कर देते थे। अब ऐसा हो गया है कि विदेशी टीमें भारत का दौरा करती है तब दो-तीन अच्छे स्पिनर को शामिल कर भारतीय टीम को परेशान कर देती है। यहां आने के बाद उनके एवरेज गेंदबाज भी शानदार गेंदबाज बन जाते हैं।

जबकि पहले भारतीय टीमों ने घरेलू और उपमहाद्वीपीय परिस्थतियों में स्पिन के अनुकूल पिचों में शानदार बल्लेबाजी की है। हालांकि अभी वर्तमान में भारतीय टीम स्पिन का सामना करने में पूरी तरह से जुझते नजर आती हैं। भारतीय टीम की गेंदबाजी भारत में शुरू से ही बेहतरीन रही है। अभी यह और मजबूत हो गई है जबकि बल्लेबाजी में स्पिन खेलने की कला में कमी देखने को मिली है।

70 के दशक में भारत की स्पिन चौकड़ी

भारतीय टीम जो कभी 70 के दशक में अपनी स्पिन गेंदबाजी से विरोधियों को परेशान किया करते थी। वहीं आज के समय में हमारे बल्लेबाज परेशान हो जाते हैं। 70 के दशक में इराप्पल्ली प्रसन्ना, बीएस चन्द्रशेखर, वेंकट राघवन और बिशन सिंह बेदी की प्रसिद्ध चौकड़ी थी, जो भारतीय पिचों पर विदेशी टीमों के खिलाफ हावी रहती थी। इन लोगों ने विदेशी बल्लेबाजों के मन में इतना डर बना दिया था कि भारत का दौरा करने वाली टीमें एक महीना पहले से ही स्पिन खेलने का अभ्यास शुरू कर देती थी लेकिन फिर भी इनकी चौकड़ी बल्लेबाजों को कुछ खास करने का मौका नहीं देती थी।

उसके बाद 1980 से लेकर 2010 तक भारतीय टीम के पास ऐसे बल्लेबाज थे जो भारत में ही नहीं बाहर भी जाकर अपनी छाप छोड़ी। कुछ ऐसे बल्लेबाज भी थे, जिन्हें घर पर स्पिन खेलने में महारत हासिल थी और अगर विदेश का दौरा करे तो स्विंग और पेस खेलने में भी माहिर थे। उस दौरान भारत में कई ऐसे दिग्गज स्पिनर भी आएं, जिन्होंने पूरी दूनिया में अपनी छाप छोड़ी लेकिन भारतीय बल्लेबाजों के आगे नतमस्तक हो गए। शेन वार्न से लेकर मुथैया मुरलीधरन तक कई ऐसे दिग्गज भी आएं लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने उन दिग्गज स्पिनरों का डटकर सामना किया और स्पिन खेलने की कला भी दुनिया को दिखाई।

हमारी ताकत ही बनी कमजोरी

आखिरी पिछले कुछ समय में ऐसा क्या हो गया कि जो हमारी ताकत थी, वही हमारी कमजोरी बन गई। भारतीय खिलाड़ी जो स्पिन के अनुकूल पिचों पर खेलकर बड़े हुए हैं लेकिन आज वही बल्लेबाज स्पिन का ढंग से सामना नहीं कर पा रहे हैं। जहां विकेट खराब होने लगती है भारतीय टीम के बल्लेबाजों के पांव क्रीज पर जमते ही नहीं हैं। समय के साथ भारतीय खिलाड़ियों का स्पिन खेलने के लिए जो तकनीक होनी चाहिए, वो धीरे-धीरे खराब होता जा रहा है। अब महेमान टीम को जितना मुश्किल स्पिन खेलने में होती है उतना ही मुश्किल भारतीय टीम को भी स्पिन का सामना करने में होती है।

स्पिन के खिलाफ क्यों संघर्ष कर रहे हैं बल्लेबाज

भारतीय पिचों पर स्पिनरों को खासा फायदा मिलता है। यहां स्पिनरों को विकेट से काफी मदद मिलती है, जिसके कारण भारत में स्पिनर ज्यादा करागर साबित होते हैं। जैसे-जैसे विकेट टूटने लगती है स्पिनरों को टर्न के साथ अधिक उछाल भी मिलने लगती है। अगर गेंदबाज गेंद को ड्रिफ्ट करवाना जानते हैं तब तो बल्लेबाजों को ऐसे गेंदबाज का सामना करने में ज्यादा ही कठिनाई आती है। क्योंकि ऐसे गेंदबाज पिच से अधिक फायदा लेने में कामयाब रहते हैं और बल्लेबाजों को खूब परेशान करते हैं।

भारत में विकेट सूखी और धीमी होती है साथ ही साथ विकेट में असमतल उछाल के साथ गेंद भी तेजी से टर्न होता है। ऐसी विकेटों पर खेलने के लिए बल्लेबाजों को अधिक सतर्कता दिखाने की जरूरत होती है। जिसके लिए बल्लेबाजों को स्पिन खेलने की कला बखूबी आनी चाहिए। स्पिन खेलने में परेशानी के कारण बल्लेबाज स्ट्राइक रोटेट नहीं कर पाते हैं। जिसके कारण भी स्पिनर्स बल्लेबाजों पर हावी हो जाते हैं। जब कोई एक बल्लेबाज ओवर की 6 गेंदें खुद खेलता है तब उसके आउट होने की संभावना भी ज्यादा होती है। इसलिए ऐसा कहा जाता था कि आप स्ट्राइक रोटेट करते रहें जिससे गेंदबाज को परेशानी हो, बल्लेबाज को नहीं।

विदेशी स्पिनर ने किया परेशान

पिछले 10-15 सालों में भारत में डेब्यू करने वाले विदेशी स्पिनर ने भारतीय बल्लेबाजों को मुश्किल में डाला है। 2008 में जब ऑस्ट्रेलिया की टीम भारत का दौरा करने आई थी तब जेसन क्रेजा ने अपने डेब्यू मुकाबले के पहली पारी में 8 और दूसरी पारी में 4 विकेट चटकाए थे। उसके बाद से विदेशी स्पिनर भारतीय बल्लेबाजों पर हावी होने लगे। अगर ऑस्ट्रेलिया के स्टीव ओ कैफी की बात करें तो उन्होंने 2021 में भारत का दौरा करते हुए दोनों पारी में 6-6 विकेट लिए थे। वहीं मैट कुहनैमन ने 5 विकेट लेकर भारतीय टीम को बता दिया था कि स्पिन खेलने की कला अब आपके पास उतनी अच्छी नहीं रही।

उसके बाद न्यूजीलैंड के एजाज पटेल ने एक पारी में 10 विकेट लेने का कारनामा भी भारत के खिलाफ भारत में ही किया। उन्होंने उस मैच में कुल 14 विकेट चटकाए। वहीं टॉड मर्फी ने 2023 में डेब्यू करते हुए एक पारी में 5 विकेट चटकाए। अब इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले ही मैच में टॉम हर्टली ने डेब्यू करते हुए एक पारी में 7 विकेट चटकाए। उसके बाद शोएब बशीर ने इस टेस्ट सीरीज के चौथे और पांचवें मुकाबले में पांच-पांच विकेट चटकाए। इस सीरीज में इंग्लैंड के टॉम हार्टली ने कुल 22 विकेट चटकाए। इन 10-15 सालों में विदेशी स्पिनर ने भारत में आकर भारतीय टीम को ही परेशान किया है।

बल्लेबाज तकनीक पर नहीं कर पाते हैं काम

अब सालभर लगातार ही पूरे विश्व में क्रिकेट खेला जाता है। ऐसे में इंटरनेशनल क्रिकेटरों को अपनी कमियों पर काम करने का मौका भी बहुत कम मिलता है। अब जो भारतीय क्रिकेटर इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने लगते है वो घरेलू क्रिकेट में भाग नहीं लेते हैं। जिस कारण से उन्हें घरेलू गेंदबाज या स्पिनर को खेलने का कम मौका मिलता है। इसके अलावा अब बल्लेबाज गेंदबाज के साथ कम और बॉलिंग मशीन के साथ ज्यादा दिखते हैं। बॉलिंग मशीन के साथ बल्लेबाज घंटों अभ्यास करते हैं। वहीं लगातार क्रिकेट होने के कारण सीमित ओवरों में बल्लेबाज स्पिनर पर ज्यादा अटैकिंग रुख अपनाते हैं और रन बनाने की कोशिश करते रहते हैं। फील्ड रिस्ट्रिक्शन होने के कारण बल्लेबाजों की कमियों का पता नहीं चलता है। जैसे ही यही बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट खेलते हैं उनकी कमियां साफ नजर आने लगती है।

गेंदबाज भी अब पहले जितना अभ्यास नहीं करते हैं। तीन फॉर्मेट में अपने आप फिट रखने के लिए गेंदबाज नेट में भी काफी कम समय व्यतीत करते हैं। जिस कारण से भी बल्लेबाजों को अपनी कमियों के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं चलता है। लगातार मैचेज के कारण गेंदबाज अब ज्यादातर अपने फिटनेस पर ध्यान देते हैं। जिससे वो ज्यादा से मैच खेल पाएं। इस कारण से अब ज्यादातर बल्लेबाजों को नेट गेंदबाज ही अभ्यास कराते नजर आते हैं।

घरेलू क्रिकेट में स्पिनर अब उतने करागर नहीं

अब बात यह भी है कि अब घरेलू क्रिकेट में उतने अच्छे स्पिनर भी नहीं रह गए हैं जो बल्लेबाजों को ज्यादा परेशान कर सके। पहले घरेलू क्रिकटे में एक से बढ़कर एक स्पिनर हुआ करते थे। जो इंटरनेशनल क्रिकेट के साथ-साथ घरेलू क्रिकेट को भी तवज्जो देते थे, लेकिन अब ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। अब लगातार मैचेज रहने के कारण इंटरनेशनल क्रिकेटर घरेलू में शामिल नहीं हो पाते है जिस कारण से अब बल्लेबाजों को क्वालिटी के स्पिनर नहीं मिलते हैं। इस कारण से भी अब घरेलू क्रिकेट में स्पिनर उतने करागर साबित नहीं होते हैं। अच्छे स्पिनर के नहीं होने के कारण बल्लेबाजों की कमियां नजर नहीं आती है।

स्पिन खेलने की बढ़िया तकनीक क्या है…

स्पिन को खेलने के लिए सबसे अच्छा उपाय है कि आपके कदम चलते रहें। आप फ्रंटफूट और बैकफूट का इस्तेमाल अच्छे ढंग से करें। कुछ बल्लेबाज टर्न कम करने के लिए निकलकर खेलते है और कुछ बल्लेबाज गेंद को टर्न होने के बाद खेलना पंसद करते हैं। अगर आप ऐसे स्पिन को खेलोंगे तब सफलता आपको मिलेगी। स्पिनर के खिलाफ अगर आप फंस गए तब गेंदबाज आपको निश्चित तौर पर आउट कर देगा। इसके अलावा आपके हाथ सॉफ्ट होने चाहिए ताकि आसपास लगे फील्डर के पास गेंद नहीं जानी चाहिए। टेस्ट क्रिकेट में कुछ इस ढंग से स्पिन खेलकर आप अच्छे स्पिनर का सामना कर सकते हैं।

लेखक: उज्जवल कुमार सिन्हा

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सीनियर महिला वन डे ट्रॉफी (प्लेट): एक और ख़िताब बिहार के नाम, बेटियों ने बढ़ाया राज्य का मान, सिक्किम को 7 विकेट से हराया

BCCI द्वारा आयोजित सीनियर महिला एकदिवसीय ट्रॉफी प्लेट के फाइनल मुकाबले में बिहार महिला टीम ने लगातार संतुलित प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। यह खिताबी मैच कटक स्थित बाराबती स्टेडियम में खेला गया, जहां बिहार ने सिक्किम को 7 विकेट से पराजित किया। इस जीत के साथ बिहार महिला टीम ने सीनियर महिला एकदिवसीय ट्रॉफी प्लेट के पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहते हुए प्रतियोगिता का समापन किया।

फाइनल में पहले बल्लेबाजी करते हुए सिक्किम की टीम 46.5 ओवर में 135 रन पर सिमट गई। बल्लेबाजी में समायिता ने 28, परिमला 20 और तबिता सुब्बा ने नाबाद 21 रन बनाया। बिहार की ओर से गेंदबाजी विभाग में सामूहिक अनुशासन देखने को मिला। खुशबू सी. कुमारी ने 8.5 ओवर में 33 रन देकर 5 विकेट लेकर विपक्षी बल्लेबाजी क्रम को नियंत्रित किया, जबकि रचना सिंह और अपूर्वा कुमारी ने मध्य ओवरों में 2-2 विकेट लेकर दबाव बनाए रखा। सीमित रन गति के कारण सिक्किम बड़ा स्कोर खड़ा नहीं कर सकी।

लक्ष्य का पीछा करते हुए बिहार महिला टीम ने संयमित शुरुआत के बाद मैच पर नियंत्रण स्थापित किया। प्रगति सिंह और वैदेही यादव के बीच बनी 92 रनों की साझेदारी ने जीत की दिशा तय की। वैदेही यादव ने नाबाद 54 रन बनाकर पारी को स्थिरता दी, जबकि कप्तान प्रगति सिंह ने 45 रनों का योगदान दिया। बिहार ने 35 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर 139 रन बनाकर मुकाबला अपने पक्ष में कर लिया।

इस फाइनल जीत के साथ बिहार महिला टीम ने पूरे टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं गंवाया, जो टीम के निरंतर प्रयास, संतुलित रणनीति और विभागीय समन्वय को दर्शाता है। बिहार क्रिकेट एसोसिएशन ने टीम के इस प्रदर्शन पर खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ को बधाई दी है तथा भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

इस अवसर पर बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हर्ष वर्धन ने बिहार महिला टीम को बधाई देते हुए कहा कि – ”यह खिताब खिलाड़ियों के निरंतर प्रयास, अनुशासन और सामूहिक समन्वय का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहना टीम की तैयारी और मानसिक मजबूती को दर्शाता है, जो भविष्य में बिहार महिला क्रिकेट के लिए सकारात्मक संकेत है।”

वहीं, बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव ज़िआउल आरफीन ने भी टीम को हार्दिक बधाई दी। सचिव ने अपने संदेश में कहा कि खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ का समर्पण इस उपलब्धि का आधार रहा है और एसोसिएशन आगे भी महिला क्रिकेट को आवश्यक संसाधन और अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा, ताकि हमारी बेटियां लगातार ऐसे ही आगे बढ़ती रहें।

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डीपीएस ईस्ट पटना की 4 विकेट से जीत, रोमांचक मुकाबले में YCC को हराया

पटना: YCC और DPS East Patna के बीच खेले गए रोमांचक टी-20 मुकाबले में डीपीएस ईस्ट पटना ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 4 विकेट से जीत दर्ज की। तेज रनगति (10.83 रन प्रति ओवर) और मध्यक्रम की सधी बल्लेबाजी के दम पर डीपीएस ईस्ट पटना ने मुकाबला अपने नाम कर लिया। मैच में बल्लेबाजों के साथ गेंदबाजों ने जीत में अहम भूमिका निभाई।

पहले बल्लेबाजी करते हुए YCC ने 20 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 146 रन बनाए। टीम की ओर से आयुष ने 30 रन, सचिन ने नाबाद 30 रन और वेद ने 18 रनों का योगदान दिया। अंत के ओवरों में सचिन और सूरज (नाबाद 19) ने तेज बल्लेबाजी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। टीम को अतिरिक्त रनों के रूप में 46 रन मिले। डीपीएस ईस्ट पटना की ओर से ऋतुराज ने किफायती गेंदबाजी करते हुए 2 विकेट झटके, जबकि सैफ और शाश्वत ने 1-1 विकेट हासिल किया।

147 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी डीपीएस ईस्ट पटना की टीम ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी की और 13.4 ओवर में 6 विकेट खोकर 148 रन बनाकर मैच अपने नाम कर लिया। अंकित ने 48 रनों की शानदार पारी खेली, जबकि दिव्यम ने 24 रन और साहिल ने 13 रनों की तेज पारी खेलकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। YCC की ओर से रुद्र ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट चटकाए, लेकिन बाकी गेंदबाजों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका।

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नालंदा जिला सीनियर क्रिकेट लीग: डॉ. सरस्वती देवी क्रिकेट क्लब की 44 रन से दमदार जीत

नालंदा: नालंदा जिला क्रिकेट संघ द्वारा आयोजित नालंदा जिला सीनियर ए डिवीजन क्रिकेट लीग में डॉ. सरस्वती देवी क्रिकेट क्लब ने लिटिल स्टार क्लब को 44 रनों से पराजित कर शानदार जीत दर्ज की। मैच के मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार विनीत कुमार को उनके उत्कृष्ट ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए प्रदान किया गया।

पहले बल्लेबाजी करते हुए डॉ. सरस्वती देवी क्रिकेट क्लब की टीम ने 10 विकेट खोकर 199 रन बनाए। टीम की ओर से अमित ने 52 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली, जबकि सूरजभान ने 51 रन और राजामणि ने 29 रनों का योगदान दिया। लिटिल स्टार क्लब की ओर से श्याम ने प्रभावशाली गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट झटके, वहीं विनीत ने 2 विकेट अपने नाम किए।

200 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी लिटिल स्टार क्लब की शुरुआत अच्छी रही। ओपनर विनीत कुमार ने 68 रन और शशि ने 51 रनों की शानदार पारी खेलकर टीम को मजबूत आधार दिया। हालांकि मध्यक्रम के लड़खड़ाने के कारण टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी और 44 रनों से मुकाबला गंवा बैठी। डॉ. सरस्वती देवी क्लब की ओर से आकाश और दिव्यांश ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए 3-3 विकेट हासिल किए और टीम की जीत सुनिश्चित की।

इस अवसर पर क्रिकेट एसोसिएशन नालंदा के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार, सचिव गोपाल कुमार सिंह, पूर्व सचिव सैयद मोहम्मद जावेद इकबाल, कोषाध्यक्ष मनोरंजन कुमार, संयुक्त सचिव संजीव कुमार, डॉ. संजय, संतोष पांडेय, हैदर अली, सिद्धार्थ कुमार बाबा, अंकित राज, विकास, मयूरेश्वर, विश्वजीत कुमार, अभिषेक कुमार सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। मैच में अंपायरिंग की जिम्मेदारी सीनियर अंपायर परवेज़ मुस्तफा पप्पू और अभिषेक ने निभाई।

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पटना जिला सीनियर क्रिकेट लीग: अनमोल कुमार के तूफानी शतक से ईआरसीसी की ऐतिहासिक जीत, विद्यार्ती सीसी को 319 रन से रौंदा

पटना: अधिकारी मदन मोहन प्रसाद मेमोरियल पटना जिला सीनियर डिवीजन क्रिकेट लीग में ईआरसीसी का विजय क्रम जारी है। यह उसकी लगातार चौथी जीत है। स्थानीय जेनेक्स क्रिकेट ग्राउंड पर रविवार यानी 15 फरवरी को खेले गए मुकाबले में ईआरसीसी ने विद्यार्थी सीसी को 319 रन से पराजित किया।

इस मैच में ईआरसीसी के खिलाड़ियों ने बल्ले और गेंद दोनों से कमाल दिखाया। विकेटकीपर बैटर अनमोल कुमार ने 53 गेंदों पर 107 रन की विस्फोटक पारी खेली। वहीं दूसरी ओर से हर्षवर्धन (61 रन), आशीष कुमार (‌80 रन), यश प्रताप (55 रन) ने अर्धशतक जमाये। गेंदबाजी में केशव ने 3 विकेट चटकाये।

ईआरसीसी की धमाकेदार शुरुआत

ईआरसीसी ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया और शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। हर्ष वर्धन मोंटी ने 61 रन बनाकर टीम को मजबूत शुरुआत दी, जिसके बाद आशीष कुमार ने 48 गेंदों पर 80 रन की तेजतर्रार पारी खेली। रोहित राज ने 19 गेंदों में 37 रन बनाकर रनगति को और तेज किया, जबकि यश प्रताप यादव ने 29 गेंदों पर 55 रन जोड़कर विपक्षी टीम की मुश्किलें बढ़ा दीं। इन पारियों की बदौलत ईआरसीसी ने 40 ओवर में 428/9 का विशाल स्कोर खड़ा किया।

अनमोल कुमार की मैच बदलने वाली पारी

प्लेयर ऑफ द मैच अनमोल कुमार की शतकीय पारी ईआरसीसी की बल्लेबाजी का सबसे बड़ा आकर्षण रही। उन्होंने 201.89 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। चौकों और छक्कों की झड़ी लगाते हुए उन्होंने विपक्षी गेंदबाजी आक्रमण को पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया और टीम को 400 के पार पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाई। अनमोल ने 53 गेंद में नौ चौका व 7 छक्का की मदद से 107 रन की पारी खेली।

लक्ष्य का पीछा करते ही बिखरी विद्यार्थी सीसी

428 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी विद्यार्थी सीसी की शुरुआत बेहद खराब रही। शुरुआती ओवरों में ही टीम ने दो विकेट बिना खाता खोले गंवा दिए, जिससे दबाव और बढ़ गया। कप्तान सनी ने 112 गेंदों पर 77 रन की संघर्षपूर्ण पारी खेली, लेकिन दूसरे छोर से लगातार विकेट गिरते रहे और पूरी टीम 33.4 ओवर में 109 रन पर सिमट गई।

ईआरसीसी गेंदबाजों का अनुशासित प्रदर्शन

ईआरसीसी के गेंदबाजों ने शानदार अनुशासन और आक्रामकता का परिचय दिया। केशव कुमार ने 4 ओवर में 19 रन देकर 3 विकेट झटके। अभिनव सिंह ने किफायती गेंदबाजी करते हुए 8 ओवर में सिर्फ 17 रन देकर 2 विकेट हासिल किए। रोहित राज और अभिषेक कुमार सिंह ने भी दो-दो विकेट लेकर विपक्षी बल्लेबाजी को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

फील्डिंग और टीम वर्क बना जीत का आधार

मैच के दौरान ईआरसीसी की फील्डिंग भी बेहतरीन रही। खिलाड़ियों ने चुस्ती दिखाते हुए महत्वपूर्ण कैच लपके और रन बचाए, जिससे विद्यार्ती सीसी पर लगातार दबाव बना रहा। टीम का सामूहिक प्रदर्शन इस बड़ी जीत का मुख्य कारण बना।

प्लेयर ऑफ द मैच अनमोल

ईआरसीसी की ओर से 107 रन की शतकीय पारी खेलने वाले अनमोल कुमार को प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार दिया गया। यह पुरस्कार बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के जिला प्रतिनिधि राजेश कुमार ने प्रदान किया और उन्हें शुभकामनाएं दीं।

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