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Opinion: 4-1 से सीरीज जीतने के बाद भी कुछ सवालों ने किया परेशान, घर में ही स्पिनर्स के सामने टिक नहीं पा रहे हैं भारतीय बल्लेबाज, जानें कहां चूक रहे हैं बल्लेबाज…

Opinion: भारतीय टीम ने इंग्लैंड के खिलाफ खेली जा रही पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में 4-1 से सीरीज को अपने नाम किया। इस टेस्ट सीरीज को जीतकर भारतीय टीम विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में पहले स्थान के लिए दावेदारी मजबूत कर दी। लगातार दो बार विश्व टेस्ट चैंपिशनशिप का फाइनल खेलने के बाद टीम इंडिया इस बार भी टेस्ट चैंपिशनशिप फाइनल खेलने के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है। इस सीरीज को भारतीय टीम ने भले ही 4-1 से अपने नाम कर लिया हो लेकिन इस टेस्ट सीरीज और पिछले कुछ सालों में घर पर खेले गए टेस्ट सीरीज में भारतीय टीम की एक कमी तेजी से उजागर हुई है।

ऐसी कमी उजागर हुई है जिसमें कभी भारतीय टीम को महारत हासिल थी। पिछले कुछ सालों में भारतीय टीम स्पिन खेलने में फिसड्डी साबित हुई है। भारतीय टीम को भारत में ही स्पिन खेलने में अब परेशानी होने लगी है। जबकि पहले यही भारतीय टीम के जीत का मंत्रा था। विदेशी टीमें के खिलाफ स्पिन ट्रैक तैयार करके उनके चारों खाने चित कर देते थे। अब ऐसा हो गया है कि विदेशी टीमें भारत का दौरा करती है तब दो-तीन अच्छे स्पिनर को शामिल कर भारतीय टीम को परेशान कर देती है। यहां आने के बाद उनके एवरेज गेंदबाज भी शानदार गेंदबाज बन जाते हैं।

जबकि पहले भारतीय टीमों ने घरेलू और उपमहाद्वीपीय परिस्थतियों में स्पिन के अनुकूल पिचों में शानदार बल्लेबाजी की है। हालांकि अभी वर्तमान में भारतीय टीम स्पिन का सामना करने में पूरी तरह से जुझते नजर आती हैं। भारतीय टीम की गेंदबाजी भारत में शुरू से ही बेहतरीन रही है। अभी यह और मजबूत हो गई है जबकि बल्लेबाजी में स्पिन खेलने की कला में कमी देखने को मिली है।

70 के दशक में भारत की स्पिन चौकड़ी

भारतीय टीम जो कभी 70 के दशक में अपनी स्पिन गेंदबाजी से विरोधियों को परेशान किया करते थी। वहीं आज के समय में हमारे बल्लेबाज परेशान हो जाते हैं। 70 के दशक में इराप्पल्ली प्रसन्ना, बीएस चन्द्रशेखर, वेंकट राघवन और बिशन सिंह बेदी की प्रसिद्ध चौकड़ी थी, जो भारतीय पिचों पर विदेशी टीमों के खिलाफ हावी रहती थी। इन लोगों ने विदेशी बल्लेबाजों के मन में इतना डर बना दिया था कि भारत का दौरा करने वाली टीमें एक महीना पहले से ही स्पिन खेलने का अभ्यास शुरू कर देती थी लेकिन फिर भी इनकी चौकड़ी बल्लेबाजों को कुछ खास करने का मौका नहीं देती थी।

उसके बाद 1980 से लेकर 2010 तक भारतीय टीम के पास ऐसे बल्लेबाज थे जो भारत में ही नहीं बाहर भी जाकर अपनी छाप छोड़ी। कुछ ऐसे बल्लेबाज भी थे, जिन्हें घर पर स्पिन खेलने में महारत हासिल थी और अगर विदेश का दौरा करे तो स्विंग और पेस खेलने में भी माहिर थे। उस दौरान भारत में कई ऐसे दिग्गज स्पिनर भी आएं, जिन्होंने पूरी दूनिया में अपनी छाप छोड़ी लेकिन भारतीय बल्लेबाजों के आगे नतमस्तक हो गए। शेन वार्न से लेकर मुथैया मुरलीधरन तक कई ऐसे दिग्गज भी आएं लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने उन दिग्गज स्पिनरों का डटकर सामना किया और स्पिन खेलने की कला भी दुनिया को दिखाई।

हमारी ताकत ही बनी कमजोरी

आखिरी पिछले कुछ समय में ऐसा क्या हो गया कि जो हमारी ताकत थी, वही हमारी कमजोरी बन गई। भारतीय खिलाड़ी जो स्पिन के अनुकूल पिचों पर खेलकर बड़े हुए हैं लेकिन आज वही बल्लेबाज स्पिन का ढंग से सामना नहीं कर पा रहे हैं। जहां विकेट खराब होने लगती है भारतीय टीम के बल्लेबाजों के पांव क्रीज पर जमते ही नहीं हैं। समय के साथ भारतीय खिलाड़ियों का स्पिन खेलने के लिए जो तकनीक होनी चाहिए, वो धीरे-धीरे खराब होता जा रहा है। अब महेमान टीम को जितना मुश्किल स्पिन खेलने में होती है उतना ही मुश्किल भारतीय टीम को भी स्पिन का सामना करने में होती है।

स्पिन के खिलाफ क्यों संघर्ष कर रहे हैं बल्लेबाज

भारतीय पिचों पर स्पिनरों को खासा फायदा मिलता है। यहां स्पिनरों को विकेट से काफी मदद मिलती है, जिसके कारण भारत में स्पिनर ज्यादा करागर साबित होते हैं। जैसे-जैसे विकेट टूटने लगती है स्पिनरों को टर्न के साथ अधिक उछाल भी मिलने लगती है। अगर गेंदबाज गेंद को ड्रिफ्ट करवाना जानते हैं तब तो बल्लेबाजों को ऐसे गेंदबाज का सामना करने में ज्यादा ही कठिनाई आती है। क्योंकि ऐसे गेंदबाज पिच से अधिक फायदा लेने में कामयाब रहते हैं और बल्लेबाजों को खूब परेशान करते हैं।

भारत में विकेट सूखी और धीमी होती है साथ ही साथ विकेट में असमतल उछाल के साथ गेंद भी तेजी से टर्न होता है। ऐसी विकेटों पर खेलने के लिए बल्लेबाजों को अधिक सतर्कता दिखाने की जरूरत होती है। जिसके लिए बल्लेबाजों को स्पिन खेलने की कला बखूबी आनी चाहिए। स्पिन खेलने में परेशानी के कारण बल्लेबाज स्ट्राइक रोटेट नहीं कर पाते हैं। जिसके कारण भी स्पिनर्स बल्लेबाजों पर हावी हो जाते हैं। जब कोई एक बल्लेबाज ओवर की 6 गेंदें खुद खेलता है तब उसके आउट होने की संभावना भी ज्यादा होती है। इसलिए ऐसा कहा जाता था कि आप स्ट्राइक रोटेट करते रहें जिससे गेंदबाज को परेशानी हो, बल्लेबाज को नहीं।

विदेशी स्पिनर ने किया परेशान

पिछले 10-15 सालों में भारत में डेब्यू करने वाले विदेशी स्पिनर ने भारतीय बल्लेबाजों को मुश्किल में डाला है। 2008 में जब ऑस्ट्रेलिया की टीम भारत का दौरा करने आई थी तब जेसन क्रेजा ने अपने डेब्यू मुकाबले के पहली पारी में 8 और दूसरी पारी में 4 विकेट चटकाए थे। उसके बाद से विदेशी स्पिनर भारतीय बल्लेबाजों पर हावी होने लगे। अगर ऑस्ट्रेलिया के स्टीव ओ कैफी की बात करें तो उन्होंने 2021 में भारत का दौरा करते हुए दोनों पारी में 6-6 विकेट लिए थे। वहीं मैट कुहनैमन ने 5 विकेट लेकर भारतीय टीम को बता दिया था कि स्पिन खेलने की कला अब आपके पास उतनी अच्छी नहीं रही।

उसके बाद न्यूजीलैंड के एजाज पटेल ने एक पारी में 10 विकेट लेने का कारनामा भी भारत के खिलाफ भारत में ही किया। उन्होंने उस मैच में कुल 14 विकेट चटकाए। वहीं टॉड मर्फी ने 2023 में डेब्यू करते हुए एक पारी में 5 विकेट चटकाए। अब इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले ही मैच में टॉम हर्टली ने डेब्यू करते हुए एक पारी में 7 विकेट चटकाए। उसके बाद शोएब बशीर ने इस टेस्ट सीरीज के चौथे और पांचवें मुकाबले में पांच-पांच विकेट चटकाए। इस सीरीज में इंग्लैंड के टॉम हार्टली ने कुल 22 विकेट चटकाए। इन 10-15 सालों में विदेशी स्पिनर ने भारत में आकर भारतीय टीम को ही परेशान किया है।

बल्लेबाज तकनीक पर नहीं कर पाते हैं काम

अब सालभर लगातार ही पूरे विश्व में क्रिकेट खेला जाता है। ऐसे में इंटरनेशनल क्रिकेटरों को अपनी कमियों पर काम करने का मौका भी बहुत कम मिलता है। अब जो भारतीय क्रिकेटर इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने लगते है वो घरेलू क्रिकेट में भाग नहीं लेते हैं। जिस कारण से उन्हें घरेलू गेंदबाज या स्पिनर को खेलने का कम मौका मिलता है। इसके अलावा अब बल्लेबाज गेंदबाज के साथ कम और बॉलिंग मशीन के साथ ज्यादा दिखते हैं। बॉलिंग मशीन के साथ बल्लेबाज घंटों अभ्यास करते हैं। वहीं लगातार क्रिकेट होने के कारण सीमित ओवरों में बल्लेबाज स्पिनर पर ज्यादा अटैकिंग रुख अपनाते हैं और रन बनाने की कोशिश करते रहते हैं। फील्ड रिस्ट्रिक्शन होने के कारण बल्लेबाजों की कमियों का पता नहीं चलता है। जैसे ही यही बल्लेबाज टेस्ट क्रिकेट खेलते हैं उनकी कमियां साफ नजर आने लगती है।

गेंदबाज भी अब पहले जितना अभ्यास नहीं करते हैं। तीन फॉर्मेट में अपने आप फिट रखने के लिए गेंदबाज नेट में भी काफी कम समय व्यतीत करते हैं। जिस कारण से भी बल्लेबाजों को अपनी कमियों के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं चलता है। लगातार मैचेज के कारण गेंदबाज अब ज्यादातर अपने फिटनेस पर ध्यान देते हैं। जिससे वो ज्यादा से मैच खेल पाएं। इस कारण से अब ज्यादातर बल्लेबाजों को नेट गेंदबाज ही अभ्यास कराते नजर आते हैं।

घरेलू क्रिकेट में स्पिनर अब उतने करागर नहीं

अब बात यह भी है कि अब घरेलू क्रिकेट में उतने अच्छे स्पिनर भी नहीं रह गए हैं जो बल्लेबाजों को ज्यादा परेशान कर सके। पहले घरेलू क्रिकटे में एक से बढ़कर एक स्पिनर हुआ करते थे। जो इंटरनेशनल क्रिकेट के साथ-साथ घरेलू क्रिकेट को भी तवज्जो देते थे, लेकिन अब ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। अब लगातार मैचेज रहने के कारण इंटरनेशनल क्रिकेटर घरेलू में शामिल नहीं हो पाते है जिस कारण से अब बल्लेबाजों को क्वालिटी के स्पिनर नहीं मिलते हैं। इस कारण से भी अब घरेलू क्रिकेट में स्पिनर उतने करागर साबित नहीं होते हैं। अच्छे स्पिनर के नहीं होने के कारण बल्लेबाजों की कमियां नजर नहीं आती है।

स्पिन खेलने की बढ़िया तकनीक क्या है…

स्पिन को खेलने के लिए सबसे अच्छा उपाय है कि आपके कदम चलते रहें। आप फ्रंटफूट और बैकफूट का इस्तेमाल अच्छे ढंग से करें। कुछ बल्लेबाज टर्न कम करने के लिए निकलकर खेलते है और कुछ बल्लेबाज गेंद को टर्न होने के बाद खेलना पंसद करते हैं। अगर आप ऐसे स्पिन को खेलोंगे तब सफलता आपको मिलेगी। स्पिनर के खिलाफ अगर आप फंस गए तब गेंदबाज आपको निश्चित तौर पर आउट कर देगा। इसके अलावा आपके हाथ सॉफ्ट होने चाहिए ताकि आसपास लगे फील्डर के पास गेंद नहीं जानी चाहिए। टेस्ट क्रिकेट में कुछ इस ढंग से स्पिन खेलकर आप अच्छे स्पिनर का सामना कर सकते हैं।

लेखक: उज्जवल कुमार सिन्हा

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पटना जिला सीनियर डिवीजन क्रिकेट लीग में रौनित का शतक, आरबीएनवाईएसी ने वाईएमसीसी को हराया

पटना, 31 मार्च। पटना जिला क्रिकेट संघ के तत्वावधान में खेली जा रही अधिकारी मदन मोहन प्रसाद मेमोरियल पटना जिला सीनियर डिवीजन क्रिकेट लीग (सुपर सिक्स) में खेले गए मुकाबले में आरबीएनवाईएसी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए वाईएमसीसी को 35 रन से हरा दिया। विजेता टीम के रौनित (110 रन) को प्लेयर ऑफ द मैच घोषित किया गया।

विक्रम स्थित याशवन स्पोट्र्स ग्राउंड पर खेले गए मैच में वाईएमसीसी ने टॉस जीता और आरबीएनवाईएसी को बैटिंग का न्योता दिया। आरबीएनवाईएसी ने 30 ओवर में सात विकेट पर 217 रन बनाये। जवाब में वाईएमसीसी ने 30 ओवर में 8 विकेट पर 182 रन ही बना सकी।

आरबीएनवाईएसी की बैटिंग

पहले बल्लेबाजी करते हुए आरबीएनवाईएसी की टीम ने 30 ओवर में 7 विकेट पर 217 रन बनाए। टीम की ओर से रौनित ने शानदार शतक जड़ते हुए 78 गेंदों में 110 रन बनाए जिसमें 10 चौके और 7 छक्के शामिल रहे। उनके अलावा हर्ष राज ने 58 रन की उपयोगी पारी खेली, जबकि अन्य बल्लेबाज ज्यादा योगदान नहीं दे सके।

जवाब में वाईएमसीसी की लड़ाई अधूरी

लक्ष्य का पीछा करने उतरी वाईएमसीसी की टीम 30 ओवर में 8 विकेट पर 182 रन ही बना सकी। टीम के लिए श्यामल पांडे ने 61 रन बनाए, जबकि ऋषभ राकेश ने 38 और कप्तान विराट पांडे ने 41 रन की पारी खेली। आरबीएनवाईएसी की जीत में गेंदबाजों की अहम भूमिका रही। सिद्धांत विजय ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए 6 ओवर में 23 रन देकर 4 विकेट झटके और मैच का रुख पलट दिया। उनके अलावा अमन आनंद ने 3 विकेट लेकर विपक्ष की कमर तोड़ दी। आरबीएनवाईएसी ने 35 रन से जीत दर्ज कर ली और सुपर सिक्स चरण में अपनी स्थिति मजबूत कर ली। बल्लेबाजी में रौनित और गेंदबाजी में सिद्धांत विजय इस जीत के हीरो साबित हुए।

संक्षिप्त स्कोर
आरबीएनवाईएसी : 30 ओवर में सात विकेट पर 217 रन, रौनित 110, हर्ष राज 58,अतिरिक्त 15,रिषभ राकेश 2/ 12, दिव्यांश 2/22, गौरव राज 1/37, कार्तिक पांडेय 2/39

वाईएमसीसी : 30 ओवर में 8 विकेट पर 182 रन, श्यामल पांडेय 61, रिषभ राकेश 38, विराट पांडेय 41, सूरज कश्यप 16, अतिरिक्त 18, श्लोक कुमार 1/35, सिद्धांत विजय 4/23, अमन आनंद 3/36

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अमित कुमार के शतक और प्रियांशु-प्रिंस की घातक गेंदबाजी से जेनेक्स अकादमी फाइनल में

पटना: बिहार कैम्ब्रिज चैंपियन ट्रॉफी अंडर-13 टूर्नामेंट के सेमीफाइनल मुकाबले में जेनेक्स क्रिकेट अकादमी ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए ईशान किशन क्रिकेट अकादमी ‘बी’ को 225 रनों से करारी शिकस्त देकर फाइनल में जगह बना ली। प्रिंस यादव को शानदार प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द मैच का पुरस्कार दिया गया।

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए जेनेक्स क्रिकेट अकादमी ने 40 ओवर में 267 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। टीम की ओर से अमित कुमार ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 99 गेंदों पर 103 रनों की बेहतरीन शतकीय पारी खेली, जिसमें 21 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। उनके अलावा प्रिंस यादव ने 44 रन और शिपु ने 23 रन का योगदान दिया।

268 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ईशान किशन क्रिकेट अकादमी ‘बी’ की टीम जेनेक्स के गेंदबाजों के सामने पूरी तरह बेबस नजर आई और महज 12.3 ओवर में 42 रनों पर सिमट गई। जेनेक्स की ओर से कप्तान प्रियांशु जे.एस. ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 5 विकेट झटके, जबकि प्रिंस यादव ने किफायती गेंदबाजी के साथ 3 विकेट हासिल किए। इसके अलावा अंश राज और गौरव राज ने भी एक-एक विकेट लेकर विपक्षी टीम को पूरी तरह दबाव में रखा। इस शानदार जीत के साथ जेनेक्स क्रिकेट अकादमी ने टूर्नामेंट के फाइनल में प्रवेश कर लिया है और टीम का मनोबल काफी ऊंचा है।

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बिहार सब-जूनियर बेसबॉल टीम चयन ट्रायल संपन्न, 50 खिलाड़ियों की सूची जल्द होगी जारी

पटना, 31 मार्च 2026: आगामी 30वीं सब-जूनियर राष्ट्रीय बालक-बालिका बेसबॉल चैंपियनशिप के लिए बिहार टीम के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी कड़ी में बेसबॉल संघ बिहार द्वारा सारण जिले के सोनपुर स्थित डाकबंगला मैदान में चयन ट्रायल का सफल आयोजन किया गया।

यह राष्ट्रीय चैंपियनशिप 24 से 29 मई 2026 तक ओडिशा के KIIT विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर में आयोजित होनी है, जिसमें भाग लेने के लिए बिहार की मजबूत टीम तैयार करने की दिशा में यह ट्रायल अहम कदम माना जा रहा है। ट्रायल शुरू होने से पहले सहायक सचिव प्रमोद कुमार, कोषाध्यक्ष रूपक कुमार, राष्ट्रीय खिलाड़ी विष्णु कुमार तथा सारण जिला के सदस्य गोल्डी, अविनाश, शिवम, अंकित और चंदन उपस्थित रहे और खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।

इस चयन ट्रायल में राज्यभर से बड़ी संख्या में खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। संघ के सचिव मधु शर्मा ने बताया कि ट्रायल के आधार पर 25 बालक एवं 25 बालिका खिलाड़ियों की सूची जारी की जाएगी। चयनित खिलाड़ियों को आगे प्रशिक्षण शिविर के लिए बुलाया जाएगा, जिसके बाद अंतिम टीम की घोषणा की जाएगी।

चयन प्रक्रिया में अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी आदित्य कुमार, राष्ट्रीय खिलाड़ी संजीत कुमार और उमंग कुमार सिंह चयनकर्ता के रूप में मौजूद रहे। पूरी चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराया गया, जिसमें सहायक सचिव प्रमोद कुमार और राष्ट्रीय खिलाड़ी मोनू कुमार की अहम भूमिका रही।

संघ के अध्यक्ष दिलजीत खन्ना ने जानकारी देते हुए बताया कि बिहार बेसबॉल टीम को राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार किया जा रहा है और खिलाड़ियों को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। यह चयन ट्रायल बिहार में बेसबॉल खेल के बढ़ते स्तर और युवा खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।

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कासा पिकोला स्कूल क्रिकेट लीग अंडर-15 टूर्नामेंट में नाइटराइडर्स और क्वांटम वारियर्स की धमाकेदार जीत

पटना। कासा पिकोला स्कूल क्रिकेट लीग अंडर-15 सीजन—6 में मंगलवार का दिन बीआईएचईआर नाइटराइडर्स के नाम रहा, जहां कप्तान शान गोस्वामी ने ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए टीम को एकतरफा जीत दिलाई। गेंद और बल्ले दोनों से चमकते हुए शान ने मैच को पूरी तरह नाइटराइडर्स के पक्ष में मोड़ दिया। वहीं दूसरे मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए क्वांटम वारियर्स ने ऑक्सफोड सुपरकिंग्स पर 90 रन से जीत दर्ज की ।

पहला मैच
कृष्णा क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए मुकाबले में बीआईएचईआर नाइटराइडर्स ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। एसआरयू फाइटर्स ने निर्धारित 20 ओवर में सात विकेट के नुकसान पर 143 रन बनाए। टीम की ओर से ओम साहिल ने 45 और सचिन यादव ने 34 रन की अहम पारियां खेलीं। नाइटराइडर्स के कप्तान शान गोस्वामी ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 32 रन देकर तीन विकेट अपने नाम किए।

लक्ष्य का पीछा करने उतरी नाइटराइडर्स की टीम ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी की। कप्तान शान गोस्वामी ने बल्लेबाजी में भी कमाल दिखाते हुए नाबाद 76 रन की विस्फोटक पारी खेली। उन्होंने 45 गेंदों में तीन छक्के और 11 चौके जड़ते हुए टीम को महज  12.4 ओवर में एक विकेट खोकर जीत दिला दी। अमन राज ने 30 रन का उपयोगी योगदान दिया। शानदार प्रदर्शन के लिए शान गोस्वामी को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

संक्षिप्त स्कोर
एसआरयू फाइटर्स: 20 ओवर में 7 विकेट पर 143 रन (ओम साहिल 45, सचिन यादव 34, नीरज 13, आदर्श नाबाद 12, अतिरिक्त 19; शान गोस्वामी 3/32, परयूष 2/26, प्रेम 1/17, विपुल 1/9)
बीआईएचईआर नाइटराइडर्स: 12।4 ओवर में 1 विकेट पर 144 रन (शान गोस्वामी नाबाद 76, अमन राज 30, अतिरिक्त 28; प्रणीत 1/25)

दूसरा मैच

दिन का दूसरा मैच क्वांटम वारियर्स बनाम ऑक्सफोड सुपरकिंग्स के बीच खेला गया, जिसमें वारियर्स ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। वारियर्स ने निर्धारित 20 ओवर में रोहन सिंह के नाबाद 66 रन, अमन कुमार के 45 और प्रांजल के 32 रन की मदद से 215 रन का स्कोर पांच विकेट खोकर बनाए। जवाब में सुपरकिंग्स के बल्लेबाज कमाल नहीं दिखा सके। पूरी टीम 15.1 ओवर में 125 रन पर सिमट गई। सुपरकिंग्स की ओर से सर्वाधिक 29 रन कप्तान अनिकेत प्रकाश ने बनाए। विजेता टीम के अमन कुमार (45 रन व 2 विकेट) को बल्ले व गेंद से शानदार प्रदर्शन के लिए प्लेयर आफ द मैच चुना गया। दोनों मैचों के प्लेयर आफ द मैच को बतौर अतिथि मौजूद रही प्रीति राय, डॉ. सदीक्षा व डॉ. निशि सिंह ने संयुक्त रूप से प्रदान किया।

संक्षिप्त स्कोर
क्वांटम वारियर्स: 20 ओवर में 5 विकेट पर 215 रन, (आयुष यादव 10, अमन कुमार 45, प्रत्युष सुंदरम 31, रोहन सिंह नाबाद 66, प्रांजल 32, अतिरिक्त 30, अंशु कुमार 2/47, आरव कुमार चंद्रा 2/43, पीयूष रंजन 1/49)

ऑक्सफोर्ड सुपरकिंग्स: 15।1 ओवर में 10 विकेट पर 125 रन, (चिराग सुजीत झा 12, अनिकेत प्रकाश 29, आयुष राज 13, भविष्य कुमार 10, अतिरिक्त 37, रजनीश 1/16, यशस्वी 1/19, अमन कुमार 2/15, अमनदीप सिंह 1223, शिवम कुमार 1/0।)

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