पटना। बिहार सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों आकाश दीप और मुकेश कुमार को उनकी खेल उपलब्धियों के आधार पर DSP पद पर नियुक्त किए जाने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग क्रिकेटर धर्मेंद्र कुमार ने भी सरकार से अपने लिए समान अवसर और सम्मान की मांग उठाई है। धर्मेंद्र कुमार ने कहा है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों की उपलब्धियों को सरकारी सम्मान और नियुक्ति का आधार बनाया जा सकता है, तो दिव्यांग खिलाड़ियों को भी इसी मापदंड पर अवसर मिलना चाहिए।
धर्मेंद्र कुमार के अनुसार, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कुल 8 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। इनमें 2 टेस्ट, 1 वनडे और 5 T20 मुकाबले शामिल हैं। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में देश का प्रतिनिधित्व करना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि है और इस उपलब्धि का सम्मान खिलाड़ी की शारीरिक क्षमता के आधार पर अलग-अलग नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिव्यांग खिलाड़ी भी कठिन परिस्थितियों और अनेक चुनौतियों के बीच मेहनत कर देश और राज्य का नाम रोशन करते हैं। ऐसे खिलाड़ियों को भी उनकी उपलब्धियों के आधार पर आगे बढ़ने और सम्मानजनक पद हासिल करने का समान अधिकार मिलना चाहिए।
DSP पद पर नियुक्ति की मांग
धर्मेंद्र कुमार ने बिहार सरकार से मांग की है कि उनकी अंतरराष्ट्रीय खेल उपलब्धियों और भारत का प्रतिनिधित्व करने के रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए उनकी योग्यता पर भी विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि उन्हें भी DSP जैसे सम्मानजनक सरकारी पद पर नियुक्ति का अवसर मिलना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार यदि खेल उपलब्धियों के आधार पर खिलाड़ियों को सरकारी पद देकर सम्मानित करती है, तो इस नीति में दिव्यांग अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को भी समान रूप से शामिल किया जाना चाहिए। इससे न केवल उन्हें व्यक्तिगत सम्मान मिलेगा, बल्कि राज्य में दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए एक सकारात्मक संदेश भी जाएगा।
हजारों दिव्यांग खिलाड़ियों का बढ़ेगा मनोबल
धर्मेंद्र कुमार का मानना है कि यदि बिहार सरकार किसी अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग खिलाड़ी को उच्च सरकारी पद पर नियुक्त करती है, तो इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा। इससे बिहार के हजारों दिव्यांग खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा और उन्हें यह भरोसा मिलेगा कि उनकी मेहनत और प्रतिभा को भी सरकार उसी सम्मान की नजर से देखती है, जिस नजर से अन्य खिलाड़ियों को देखा जाता है। उन्होंने कहा कि इससे दिव्यांग युवाओं को खेल के क्षेत्र में करियर बनाने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रेरणा मिलेगी। उनका मानना है कि सरकार का एक सकारात्मक फैसला आने वाली पीढ़ी के लिए मिसाल बन सकता है।
सहानुभूति नहीं, समान अधिकार की मांग
धर्मेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी तरह की विशेष सहानुभूति पर आधारित नहीं है। वह अपनी अंतरराष्ट्रीय खेल उपलब्धियों के आधार पर समान अवसर और अधिकार की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बिहार सरकार से अपील करते हुए कहा कि दिव्यांग खिलाड़ियों की उपलब्धियों का मूल्यांकन भी उनकी प्रतिभा, मेहनत और प्रदर्शन के आधार पर किया जाए। उनका कहना है कि दिव्यांग होना किसी खिलाड़ी की देश के प्रति निष्ठा या खेल उपलब्धि को कम नहीं करता।





