Bihar Cricket Association: बिहार क्रिकेट एसोसिएशन लगातार विवादों में रहा। अभी भी बिहार में क्रिकेट मैदान पर कम कोर्ट में ज्यादा खेला जा रहा है। लगातार आरोपों के बीच एक और जन्म प्रमाण पत्र में कथित हेराफेरी और धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। मामला सामने आते ही बीसीए ने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए संबंधित खिलाड़ी को टीम से बाहर कर दिया था। हालांकि, कुछ ही समय बाद उसी खिलाड़ी को दूसरे आयु वर्ग की टीम में शामिल कर लिया गया, जिससे संघ की मंशा और निर्णय प्रक्रिया को लेकर विवाद और गहरा गया।
इस पूरे मामले के केंद्र में बेगूसराय के क्रिकेटर जयंत गौतम हैं, जिन पर जन्म प्रमाण पत्र में कथित हेराफेरी और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोपों के सार्वजनिक होते ही मामला तूल पकड़ने लगा, जिसके बाद बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए जयंत गौतम को विभिन्न आयु वर्ग की टीमों से बाहर कर दिया है। बीसीए ने इस प्रकरण को गंभीर मानते हुए खिलाड़ी से स्पष्टीकरण (एक्सप्लेनेशन) भी तलब किया है। संघ ने दस्तावेजों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है।

बीसीसीआई द्वारा आयु-हेराफेरी को लेकर सख्त निर्देश जारी हैं, जिसके अनुपालन में बीसीए भी समय-समय पर नोटिफिकेशन जारी करता रहा है। जैसे ही जयंत गौतम से जुड़ा मामला सामने आया, बीसीए ने 23 अक्टूबर 2025 को नोटिफिकेशन जारी करते हुए उन्हें बिना कोई मैच खिलाए अंडर-23 टीम से बाहर कर दिया था। हालांकि इसके बाद उन्हें अंडर-19 टीम में शामिल किया गया, लेकिन विवाद गहराने पर बीसीए ने पुनः कार्रवाई करते हुए टीम से बाहर कर दिया है और जवाब मांगा है।
जानकारी के अनुसार, जयंत गौतम के दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्र सामने आए हैं। दोनों ही प्रमाण पत्र ऑनलाइन जारी बताए जा रहे हैं, जिससे संदेह और गहरा गया है।
- पहला जन्म प्रमाण पत्र बांका जिले के रजौन प्रखंड से निर्गत बताया गया है, जिसमें जन्म तिथि 2 जुलाई 2006 दर्ज है।
- दूसरा जन्म प्रमाण पत्र बेगूसराय से निर्गत हुआ है, जिसमें जन्म तिथि 2 जुलाई 2008 अंकित है।

इसी मामले को लेकर 12 नवंबर 2025 को पाटलिपुत्र थाना, पटना में उम्र हेराफेरी के आरोप में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत की जानकारी मिलते ही बीसीए ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए 27 नवंबर 2025 को जयंत गौतम को अंडर-19 टीम से भी बिना मैच खेले बाहर कर दिया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, जयंत गौतम पर न केवल जन्म प्रमाण पत्र में हेराफेरी का आरोप है, बल्कि शैक्षणिक दस्तावेजों में भी अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2024 में बिहार से मैट्रिक परीक्षा दी, जबकि उसी वर्ष स्नातक की परीक्षा में भी शामिल हुए। इसके अलावा, जयंत गौतम वर्ष 2023 में TW3 बोन टेस्ट में भी असफल बताए जा रहे हैं।
यह मामला न केवल उम्र-हेराफेरी जैसी गंभीर समस्या को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि बिहार क्रिकेट में पारदर्शिता और अनुशासन को लेकर अभी कई सवालों के जवाब बाकी हैं। फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है और अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि बीसीए आगे क्या कदम उठाती है और जांच के बाद क्या अंतिम निर्णय लिया जाता है। यह प्रकरण राज्य क्रिकेट में उम्र और दस्तावेज़ी पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।






