पटना। दिनांक 4 फरवरी 2023 को बिहार क्रिकेट संघ की हुई विशेष आम सभा में लिए गए निर्णय के अनुपालन में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 14 सितंबर 2022 एवं बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के संविधान द्वारा प्रदत्त शक्ति के तहत बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के शिकायत निवारण प्रक्रिया के लिए नैतिक पदाधिकारी सह लोकपाल के पद पर सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश श्री पारस नाथ राय को नियुक्त किया गया है।

बीसीए प्रवक्ता कृष्णा पटेल ने बताया कि सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश श्री पारस नाथ राय जी की ओर से बीसीए के नैतिक पदाधिकारी सह लोकपाल पद को ग्रहण करने के लिए दी गई स्वीकृति पत्र प्राप्त हो चुकी है। जिसके बाद बीसीए के नए नैतिक पदाधिकारी सह लोकपाल सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश श्री पारस नाथ राय जी को बीसीए परिवार की ओर से बधाई देने वाले पदाधिकारियों का तांता लगा हुआ है।

बीसीए के मानद सचिव अमित कुमार, जिला संघों के प्रतिनिधि ओम प्रकाश जयसवाल, क्रिकेट एडवाइजरी कमिटी के चेयरमैन सह बीसीए के पूर्व सचिव अजय नारायण शर्मा, रविशंकर प्रसाद सिंह, पूर्व कोषाध्यक्ष आनंद कुमार, प्रवीण कुमार, क्रिकेट एडवाइजरी कमिटी के संयोजक सह बीसीए के पूर्व कोषाध्यक्ष राम कुमार, खगड़िया जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष सह परबत्ता विधायक डॉ. संजीव कुमार, टूर्नामेंट कमेटी के पूर्व चेयरमैन संजय सिंह, बिहार क्रिकेट लीग के संयोजक ओमप्रकाश तिवारी, त्रिविक्रम नारायण सिंह, टूर्नामेंट कमेटी के चेयरमैन विजय नारायण चुन्नू, सम्मानित सदस्य संजय कुमार सिंह उर्फ चुन्नू, हरिओम झा,संयोजक सौरव चक्रवर्ती, जीएम लॉजिस्टिक धर्मवीर पटवर्धन, बीसीए प्रवक्ता कृष्णा पटेल, रोहित शर्मा सहित सभी जिला क्रिकेट संघ के सम्मानित पदाधिकारियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए बधाई संदेश दिया साथ हीं साथ यह उम्मीद जताया कि बीसीए कि इस न्यायपालिका में खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों व जिला संघों के साथ मनमानी तरीके से असंवैधानिक कार्य करने वाले पर निष्पक्ष जांच और सुनवाई कर संवैधानिक अधिकार के तहत कार्य करने वालों के साथ न्याय की जीत होगी ।

तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट पर आदित्य वर्मा की मांग, निगरानी विभाग से हो आगे की जांच
पटना: बिहार क्रिकेट संघ (बीसीए) के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर एक अहम कदम उठाया गया है। बिहार के डीजीपी के आदेश पर पुलिस महानिरीक्षक, केंद्रीय प्रक्षेत्र, पटना द्वारा सिटी एसपी (पश्चिमी) के नेतृत्व में गठित त्रिसदस्यीय जांच समिति ने बीसीए से जुड़ी दो एफआईआर में फिर से जांच (पुनः अनुसंधान) की अनुशंसा की है। यह समिति आदित्य वर्मा के आवेदन पर गठित की गई थी।
जांच समिति ने पाया कि बिहार क्रिकेट संघ के खिलाफ दर्ज तीन मामलों में से दो मामलों की जांच ठीक से नहीं की गई है। इनमें पहला मामला कोतवाली थाना कांड संख्या 49/23 से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि बाहरी राज्यों के खिलाड़ियों से मोटी रकम लेकर उन्हें फर्जी या गलत पते पर बने डोमिसाइल प्रमाण पत्र के जरिए “बिहारी खिलाड़ी” दिखाकर बीसीसीआई के मैचों में खिलाया गया।
इस मामले में पैसों के लेन-देन से जुड़ा एक ऑडियो भी पेन ड्राइव में दिया गया था, लेकिन जांच के दौरान उसकी पड़ताल नहीं की गई। समिति ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए दोबारा जांच की सिफारिश की है। इस कांड में राकेश कुमार तिवारी, दिलीप सिंह, सिद्धार्थ राज सिन्हा, विष्णु शंकर, अनंत प्रकाश सहित कुल आठ लोगों के खिलाफ फिर से जांच करने की बात कही गई है।

दूसरा मामला एसके पुरी थाना कांड संख्या 337/24 से संबंधित है। यह मामला बीसीए के कोषाध्यक्ष की मृत्यु के बाद बैंक खातों से रुपये की निकासी और ट्रांसफर से जुड़ा है। आरोप है कि नए कोषाध्यक्ष की नियुक्ति के बाद भी मृत कोषाध्यक्ष के हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर बैंक से बड़ी रकम ट्रांसफर की गई और एक लाख रुपये नकद निकाले गए। समिति ने इस मामले की जांच में कई गंभीर कमियां पाईं और इसे भी दोबारा जांच के योग्य बताया है। इस कांड में बैंक अधिकारियों, राकेश कुमार तिवारी और लेखापाल मनीष कुमार के खिलाफ पुनः अनुसंधान की सिफारिश की गई है।
इस मामले को लेकर आदित्य वर्मा ने क्या कहा?
इस पूरे मामले पर जारी बयान में आदित्य वर्मा ने कहा है कि दोनों मामलों के मुख्य आरोपी राकेश कुमार तिवारी हैं, जो भाजपा के प्रदेश कोषाध्यक्ष भी हैं। उन्होंने इस वजह से देश के माननीय गृह मंत्री, बिहार के गृह मंत्री और बिहार के पुलिस महानिदेशक से इन मामलों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। यह मामला अब एक बार फिर चर्चा में आ गया है और जांच दोबारा शुरू होने की सिफारिश के बाद बीसीए की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।




